Марои мусаххари ақл муҷоз натавон кард

مرا مسخّر عقل مجاز نتوان کرد

Ки риндро ба ситами тавба боз натавон кард

که رند را به ستم توبه باز نتوان کرد

Ман он ниёз кунам дар шабӣ ба май хӯрдан

من آن نیاز کنم در شبی به می خوردن

Ки дар намоз ба умр дароз натавон кард

که در نماز به عمر دراز نتوان کرد

Куҷои фусурдаи дилонро самоъ завқ диҳад

کجا فسرده دلان را سماع ذوق دهد

Чу сӯз сина набошад ниёз натавон кард

چو سوز سینه نباشد نیاز نتوان کرد

Шудам ба масҷид ва гуфтам намози бгзорм

شدم به مسجد و گفتم نماز بگزارم

Ки ҳам ба кул дар тоъат фароз натавон кард

که هم به کُل در طاعت فراز نتوان کرد

Хаёли дӯст ба ман гуфт рӯй баргардон

خیال دوست به من گفت روی برگردان

Ки дар ду қибла ба як дил намоз натавон кард

که در دو قبله به یک دل نماز نتوان کرد

Малолат аз ақаб ошиқон кунанд вале

ملالت از عقبِ عاشقان کنند ولی

зи пеши ҳакими азал эҳтироз натавон кард

ز پیش حکیم ازل احتراز نتوان کرد

Биҳишти нася наме боядам ба тоъати нақд

بهشت نسیه نمی بایدم به طاعت نقد

Ки ин муомила бо аҳл роз натавон кард

که این معامله با اهل راز نتوان کرد

Ба заъми муддаӣон , айш тоза хоҳам дошт

به زعم مدعیان ، عیش تازه خواهم داشت

Ки хўзи ҳам дами дерина боз натавон кард

که خوز هم دم دیرینه باز نتوان کرد

Фидоӣ дӯст кунад ҷони нзорӣу Маҳмӯд

فدای دوست کند جان نزاری و محمود

Чаҳ ҷон буд ки фидоӣ Аёз натавон кард

چه جان بود که فدای ایاز نتوان کرد