Ваа чаҳ ғам буд ки бахтам ба ту мансӯб накард
وه چه غم بود که بختم به تو منسوب نکرد
Сабр аз ин беш ки ман мекунам Айюб накард
صبر از این بیش که من میکنم، ایوب نکرد
Ин маломат ки ман аз ҳиҷри ту бо худ кардам
این ملامت که من از هجر تو با خود کردم
Дар фироқи писари гум шуда ёқӯб накард
در فراقِ پسرِ گم شده، یعقوب نکرد
Қалам аз ҷаври ту бар ҳарф ғамӣ наниҳодам
قلم از جور تو بر حرفِ غمی ننهادم
Кам хаёли ту сияҳ рӯй чу мактуб накард
کِم خیال تو سیهروی چو مکتوب نکرد
Соғарӣ май ки ба ман дод ба ёди лаби ту
ساغری می که به من داد به یاد لب تو
Ки зи баси гиряи канорам мемқлўб накард
که ز بس گریه کنارم می مقلوب نکرد
Охир эй дидаи ҳиҷоб аз ман мискин чаҳ кунӣ
آخر ای دیده! حجاب از من مسکین چه کنی؟
Дар мисли хуби нгўинд ки но хуб накард
در مثل خوب نگویند که «ناخوب نکرد»
Рӯй ман оина аз оҳани чинии пиндор
روی من آینه از آهن چینی پندار
Рӯй зебо касе аз оина маҳҷӯб накард
روی زیبا کسی از آینه محجوب نکرد
Бо ки гӯям ки рақиби онкии марои душман буд
با که گویم که رقیب آن که مرا دشمن بود
Кард бар дарди дилами раҳмат ва маҳбӯб накард
کرد بر درد دلم رحمت و محبوب نکرد
Ман бад-ӣни воқеаи хосам , на ки кас дар раҳи ишқ
من بدین واقعه خاصم، نه که کس در رهِ عشق
Пой наниҳод ки сар дар сар матлӯб накард
پای ننهاد که سر در سر مطلوب نکرد
Сари зи бедоди нзорӣ чаҳ кашии тан дар даҳ
سَر ز بیداد نزاری چه کشی؟ تن در دِه
Кӯи дилӣ каз ситами ишқи лагад кӯб накард
کو دلی کز ستم عشق لگدکوب نکرد