Дилӣ ки пеши ғам аз собирӣ сипар созад

دلی که پیشِ غم از صابری سپر سازد

Ғизои дили магар аз гӯша ҷигар созад

غذایِ دل مگر از گوشۀ جگر سازد

Ба ранҷи ҳиҷри ту дар сохтам чу мумкин нест

به رنجِ هجرِ تو در ساختم چو ممکن نیست

Ки бо касе ба мудорои ғами ту дар созад

که با کسی به مدارا غمِ تو در سازد

Дил замона бисӯзад зи сӯзи ман чу дилам

دلِ زمانه بسوزد ز سوزِ من چو دلم

Навой ишқи ту бо нола саҳар созад

نوایِ عشقِ تو با نالۀ سحر سازد

Маро ба ишқи ту тақдири чарх роҳ намӯд

مرا به عشقِ تو تقدیرِ چرخ راه نمود

Агар на ақли зи пеши бало ҳазар созад

اگر نه عقل ز پیشِ بلا حذر سازد

Вале чу ҳукми қазои сипеҳр нозил шуд

ولی چو حکمِ قضایِ سپهر نازل شد

Гумон мабар ки касе дофеъ қадар созад

گمان مبر که کسی دافعِ قدر سازد

Дилами висоли турои боз агар аҷал бирасад

دلم وصالِ ترا باز اگر اجل برسد

Ба ҳар ҳиял ки буд чора дигар созад

به هر حیل که بود چارۀ دگر سازد

Агар чаҳ кори нзории замона бо ту насохт

اگر چه کار نزاری زمانه با تو نساخت

Умедворами ореи худо магар созад

امیدوارم آری خدا مگر سازد