Дилами зи сӯзи ҷигари дам ба дами бамии сӯзад
دلم ز سوز جگر دم به دم بمیسوزد
Кадоми дил ки зи сар то қадами бамии сӯзад
کدام دل که ز سر تا قدم بمیسوزد
Аҷаби зи мардумаки дида мондаам ки мудом
عجب ز مردمک دیده مانده ام که مدام
Миёни оби ду чашмаст ва ҳам бамии сӯзад
میان آب دو چشم است و هم بمیسوزد
зи оҳи ман дами боди сабо наме Фсрд
ز آه من دمِ باد صبا نمی فسرَد
зи сӯзи ман нафаси субҳи дами бамии сӯзад
ز سوز من نفس صبح دم بمیسوزد
з май ки мӯниси ҷон буд бар шикасти дилам
ز می که مونس جان بود بر شکست دلم
Ки дар урӯқи зи андешаи дами бамии сӯзад
که در عروق ز اندیشه دم بمیسوزد
зи ҷоми ҷам чаҳ кунад муфлисӣ ки дар шаби тор
ز جام جم چه کند مفلسی که در شب تار
Ба дӯди оҳи саҳари малики ҷами бамии сӯзад
به دود آه سحر ملک جم بمیسوزد
Ба ман намонад з ҳастӣу нестии чизе
به من نماند ز هستی و نیستی چیزی
Ки барқи ишқ , вуҷӯду адами бамии сӯзад
که برق عشق ، وجود و عدم بمیسوزد
Агар бсухт танам аз сумуми ғам чаҳ аҷаб
اگر بسوخت تنم از سموم غم چه عجب
Ки одамии зи баси ифроти ғами бамии сӯзад
که آدمی ز بس افراط غم بمیسوزد
Бсухтему дамӣ дар рақиб мо нагирифт
بسوختیم و دمی در رقیب ما نگرفت
Балии балии магари афсурда кам бамии сӯзад
بلی بلی مگر افسرده کم بمیسوزد
зи бас ки шуълаи оҳам ба шеър дар печад
ز بس که شعله آهم به شعر در پیچد
Мидоди вақти китобати қалами бамии сӯзад
مداد وقت کتابت قلم بمیسوزد
Ҳазари зи сӯзи нзорӣ каз оташи сина
حذر ز سوز نذاری کز آتش سینه
Ба чанг бар нафаси зеру Бами бамии сӯзад
به چنگ بر نفس زیر و بم بمیسوزد