Марои дилии сет ки бар хештани бамии сӯзад
مرا دلی ست که بر خویشتن بمیسوزد
Чунон ки ҷонам аз он сӯхтани бамии сӯзад
چنان که جانم از آن سوختن بمیسوزد
Даруни сина аҷаб нест гар бисӯзад дил
درون سینه عجب نیست گر بسوزد دل
Чу аз буруни танами перҳани бамии сӯзад
چو از برون تنم پیرهن بمیسوزد
Ба номаи шарҳи фироқаш наметавонам дод
به نامه شرح فراقش نمی توانم داد
Ки нӯки хомаи зи дӯди сухани бамии сӯзад
که نوک خامه ز دود سخن بمیسوزد
Чунон бсухтаам дар ғами ҷудои дӯст
چنان بسوخته ام در غم جدایی دوست
Ки чархро дил бар ҷони ман бамии сӯзад
که چرخ را دل بر جان من بمیسوزد
Бсухт ҷонам аз ин пас нафас нахоҳам зад
بسوخت جانم از این پس نفس نخواهم زد
зи сўзнокии оҳами даҳани бамии сӯзад
ز سوزناکیِ آهم دهن بمیسوزد
зи оташи ғам , нафти фироқ наздик аст
ز آتشِ غم ، نفتِ فراق نزدیک است
Ки ҳар куҷо ки нишинам ватани бамии сӯзад
که هر کجا که نشینم وطن بمیسوزد
Аҷаби мадор аз ин сон ки гаштаам бар ман
عجب مدار از این سان که گشته ام بر من
Дили нзории ки мумтаҳани бамии сӯзад
دلِ نزاریَ کِ ممتحن بمیسوزد