Хунаки дилӣ ки зимом ризо диҳад ба қазо

خنک دلی که زمام رضا دهد به قضا

Чу рӯзгор нагардад зи иқтизои ризо

چو روزگار نگردد ز اقتضای رضا

Ба нӯки калаки азал ҳар чаҳ бўднисти нигошт

به نوکِ کلک ازل هر چه بودنیست نگاشت

Қазоӣ кун Фикўн бар саҳифаи мабда

قضای کن فیکون بر صحیفة مبدا

Нишони маърифати марди содиқ он бошад

نشان معرفتِ مرد صادق آن باشد

Ки иқтидо ба таваккул кунад ба хавфу раҷо

که اقتدا به توکل کند به خوف و رجا

Ба пои мардии ақли забун чаҳ дафъ кунем

به پای مردی عقل زبون چه دفع کنیم

Муборакаст балое ки рӯй кард ба мо

مبارک است بلایی که روی کرد به ما

Фалак чигуна мувофиқ шавад мабанд хаёл

فلک چگونه موافق شود مبند خیال

Қазо чигуна ҳимоят кунад мпзи савдо

قضا چگونه حمایت کند مپز سودا

Чаҳ неки бахт буд бандае ки дар ҳамаи ҳол

چه نیک بخت بود بنده ای که در همه حال

Сипос дорад ва розӣ шавад ба ҳукми худо

سپاس دارد و راضی شود به حکم خدا

Нзорё ба калиди тамаъ кушода нашуд

نزاریا به کلید طمع گشاده نشد

Дар сарои фарохи осмони танги фазо

در سرایِ فراخ آسمانِ تنگ فضا

Тавофи каъба мақсӯд кун ки бе мақсӯд

طواف کعبة مقصود کن که بی مقصود

Басӣ шуд омад кардӣ ба фикр бесару по

بسی شد آمد کردی به فکر بی سر و پا

Муяссарат нашавад ҷуз ба хилвати осоиш

میسرت نشود جز به خلوت آسایش

Мусалламат нашавад ҷуз ба азлати истиғно

مسلمت نشود جز به عزلت استغنا

Забун нагашт чу мўсиҷаҳи хрФи мурғӣ

زبون نگشت چو موسیجة خرف مرغی

Ки ошиёна азлат гирифт чун анқо

که آشیانة عزلت گرفت چون عنقا

Ҷаҳон ва ҳар чаҳ дар ӯ ҳаст нест ҷузи фонӣ

جهان و هر چه در او هست نیست جز فانی

Касе чигуна наад дил бар ин мақоми фано

کسی چگونه نهد دل بر این مقام فنا