Пой ҳар кас ки дар он силсила мишкӣн шуд
پای هر کس که در آن سلسلهٔ مشکین شد
Фориғ аз қоидау суннати аҳл дайн шуд
فارغ از قاعده و سنت اهل دین شد
Нофаи машк ки аз бод сабо мезад лоф
نافه مشک که از باد صبا میزد لاف
Чини зулф ту бидиду Рахши пар чин шуд
چین زلف تو بدید و رخش پر چین شد
Гули магар бар рух чун моҳи ту афканди назар
گل مگر بر رخ چون ماه تو افکند نظر
Варақаш аз арақи шарму ҳасад парвин шуд
ورقش از عرق شرم و حسد پروین شد
Сарвро рафтани чолоки ту хуб омад , гуфт :
سرو را رفتن چالاک تو خوب آمد ، گفت:
Чобукӣ бар қад ва бар қомати ту таъйин шуд
چابکی بر قد و بر قامت تو تعیین شد
Дасти симини ту муҳтоҷ набӯдӣ ба хизоб
دست سیمین تو محتاج نبودی به خضاب
То чаҳ май хост ки дар хӯни ман мискин шуд
تا چه می خواست که در خون من مسکین شد
Лаби ширини ту коФоқ аз ӯ пар шӯр аст
لب شیرین تو کآفاق از او پر شور است
Изтироби дили маҷнӯни маро таскин шуд
اضطراب دل مجنون مرا تسکین شد
Илми аллоҳ ки дигар тоқат ҳиҷронам нест
علم الله که دگر طاقت هجرانم نیست
Бскаҳ аз дасти ту фарёд ба алӣин шуд
بسکه از دست تو فریاد به علیین شد
Раҳм кун бар ман бечораи алии рағми рақиб
رحم کن بر من بیچاره علی رغم رقیب
Аз кӣ ?ути куштану бедоди касон ойин шуд
از کی ات کشتن و بیداد کسان آیین شد
Ҳосидам гуфт нзории суханатро ӣнқадар
حاسدم گفت نزاری سخنت را اینقدر
Аз куҷо хост ки ситш ба ҷаҳон чандин шуд
از کجا خاست که صیتش به جهان چندین شد
Гуфтамаш хусрави хубони бути шукри лаби ман
گفتمش خسرو خوبان بت شکر لب من
Бӯса Эй дод ба ман зон суханам ширин шуд .
بوسه ای داد به من زان سخنم شیرین شد.