Маро ки ҷон ба даҳон аз фироқи ёри баромад

مرا که جان به دهان از فراق یار برآمد

Ҳазор бор фурӯ шуд ҳазор бори баромад

هزار بار فرو شد هزار بار برآمد

Чаҳ мекунам зи чунин рӯзгор бе ту дариғо

چه می کنم ز چنین روزگار بی تو دریغا

Ки дар фироқи зи ҷону дилами дамори баромад

که در فراق ز جان و دلم دمار برآمد

Дилами зи меҳр ва вафо рафт хонаи хонаи ҳам чун меҳр

دلم ز مهر و وفا رفت خانه خانه هم چون مهر

Вафо надид басии гирд ҳар диёри баромад

وفا ندید بسی گرد هر دیار برآمد

Канор то ба миён чун баромадаи сети зи чашмам

کنار تا به میان چون برآمده ست ز چشمم

Ки аз миёни ту шурии ҳазор бори баромад

که از میان تو شوری هزار بار برآمد

Гиреҳ гиреҳ шавад аз хӯни бастаи дили ришам

گره گره شود از خونِ بسته دل ریشم

Нафаси нафас ки зи ҳалқам ба изтирори баромад

نفس نفس که ز حلقم به اضطرار برآمد

Фурӯ шудаи сети марои хори ишқ бар раги ҷонам

فرو شده ست مرا خار عشق بر رگ جانم

Дамор аз раги ҷонами зи хори хори баромад

دمار از رگ جانم ز خار خار برآمد

Агар баромади хор аз канори ёсумани ту

اگر برآمد خار از کنار یاسمن تو

Бадеъ нест ки гули ҳам зи нӯки хори баромад

بدیع نیست که گل هم ز نوکِ خار برآمد

Балои ишқи ту моро каманди ишқ ба гардан

بلای عشق تو ما را کمند عشق به گردن

Бараҳна кард ва ба бозори рӯзгори баромад

برهنه کرد و به بازار روزگار برآمد

На ҳам нзории мискин ба баҳри ишқ фурӯ шуд

نه هم نزاری مسکین به بحر عشق فرو شد

Ки чун нзорӣ аз ин дасти садҳазори баромад

که چون نزاری از این دست صدهزار برآمد