Соқиои хез ки гули боз ба бустон омад
ساقیا خیز که گل باز به بستان آمد
Булбули маст дигар бора ба дастон омад
بلبل مست دگر باره به دستان آمد
намебигардон ки барин ташти нигунсор фалак
می بگردان که برین تشت نگون سار فلک
Дам ба дам чун қадаҳи даври ту гардон омад
دم به دم چون قدح دور تو گردان آمد
Дар чунин давр ба бустони рӯ бо хонаи мё
در چنین دور به بستان رو با خانه میا
То нгўинд ки худ боз ба зиндон омад
تا نگویند که خود باز به زندان آمد
Сабза бар оби равон боз бидон ме монад
سبزه بر آب روان باز بدان میماند
Ки Хизри бози сӯии чашма ҳайвон омад
که خضر باز سوی چشمه حیوان آمد
Мурда бо хеш аҷаб набӯд агар вақти баҳор
مرده با خویش عجب نبود اگر وقت بهار
Аз хурӯшидани мурғон саҳар хон омад
از خروشیدن مرغان سحر خوان آمد
Ин бихӯрӣ сет ки бар миҷмар аттор афтод
این بخوری ست که بر مجمر عطار افتاد
ё насимии сет ки аз равза ризвон омад
یا نسیمی ست که از روضه رضوان آمد
Рӯй кҳсор чунонаст ки каси пиндорад
روی کُهسار چنان است که کس پندارد
Бар сараши барги гулу лола чу борон омад
بر سرش برگ گل و لاله چو باران آمد
Ҳар ҷавоҳир ки бпрўрд ва ниҳон кард фалак
هر جواهر که بپرورد و نهان کرد فلک
Аз дили кӯҳи магар бар зибр кон омад
از دل کوه مگر بر زبرِ کان آمد
Баъд аз ин ту сипарии пеши назари қоими дор
بعد از این تو سپری پیش نظر قایم دار
Баркаш аз ғунчаи бодом ки пайкон омад
برکش از غنچه بادام که پیکان آمد
Вақт айшаст дар атрофи гулистон ки саҳоб
وقت عیش است در اطراف گلستان که سحاب
Рост чун табъи нзории гуҳар афшон омад
راست چون طبع نزاری گهر افشان آمد