Меҳри ту эй ёр бе вафои ҳамаи кин буд

مهر تو ای یار بی وفا همه کین بود

Аҳди туу қавли устувори ҳамин буд

عهد تو و قول استوار همین بود

Чашми ту моро ба ғамза дар ғалати афканд

چشم تو ما را به غمزه در غلط افکند

Гар чаҳ дилам бар хилофи аҳди яқин буд

گر چه دلم بر خلاف عهد یقین بود

Зулфи ту моро ба доми фитнаи гирифтор

زلف تو ما را به دام فتنه گرفتار

Кард сазои дили фузули ман ин буд

کرد سزای دل فضول من این بود

Аз ту тамаъи доштами вафо ва надидам

از تو طمع داشتم وفا و ندیدم

Ҳукми зи мабдаи магари чунон на чунин буд

حکم ز مبدا مگر چنان نه چنین بود

Воя ӣ мо бо замона рост наомад

وایه ی ما با زمانه راست نیامد

Кӯшиши мақсуми осмону замин буд

کوشش مقسوم آسمان و زمین بود

Бози кушодами шабии каманди ду зулфаш

باز گشادم شبی کمند دو زلفش

Дар хам ҳар як ҳазор нофа ӣ чин буд

در خم هر یک هزار نافه ی چین بود

Силсила дар пойу тавқи ишқ ба гардан

سلسله در پای و طوق عشق به گردن

Ҳам чу дили ман ҳазор гӯша нишин буд

هم چو دل من هزار گوشه نشین بود

Чашми вафои доштан аз он санам эй дил

چشم وفا داشتن از آن صنم ای دل

Ҷаҳли нахустин ёру ақли пасин буд

جهل نخستین یار و عقل پسین بود

Шодӣ вақте ки дар баробари рӯйиш

شادی وقتی که در برابر رویش

Соғар май бар кафам чу моءи муайян буд

ساغر می بر کفم چو ماء معین بود

Шукр накардӣ нзорё ки чаҳ шаб ҳо

شکر نکردی نزاریا که چه شب ها

То ба саҳар бо ту офтоби қарин буд

تا به سحر با تو آفتاب قرین بود

Ёди шабистон ӯ ки рашк тароз аст

یاد شبستان او که رشک تراز است

Ёди гулистон ӯ ки хулди барин буд

یاد گلستان او که خلد برین بود