Хушо ки ид ба мо ваъда висол диҳад

خوشا که عید به ما وعدۀ وصال دهد

Намози шоми уфуқи мужда ҳилол диҳад

نمازِ شام افق مژدۀ هلال دهد

Ғуломи ҳиммати онам ки чун бидид ҳилол

غلامِ همّتِ آنم که چون بدید هلال

Пё пайам ду се соғар мезулол диҳад

پیا پی ام دو سه ساغر میِ زلال دهد

Май эй ба соғари симин на ҳад ман бошад

می ای به ساغرِ سیمین نه حّدِ من باشد

Раҳин миннатам ар низ аз суфол диҳад

رهینِ منّتم ار نیز از سفال دهد

Вуҷӯди ман чу дарахтии сет дар сарочаи хок

وجودِ من چو درختی ست در سراچۀ خاک

Ки оби талхи рузаши қӯт ниҳол диҳад

که آبِ تلخِ رزش قوّتِ نهال دهد

Пас аз муҷоҳидаи рӯзаи мӯҳтасиб вақт аст

پس از مجاهدۀ روزه محتسب وقت است

Ки тарки дарра ва омад шуд маҳол диҳад

که ترکِ درّه و آمد شدِ محال دهد

Фироқи бода ба сӣ рӯзи он қафо додам

فراقِ باده به سی روز آن قفا دادم

Ки рӯзгори магар дар ҳазор сол диҳад

که روزگار مگر در هزار سال دهد

Бибин чаҳ мояи девонагии сети гуруснагӣ

ببین چه مایۀ دیوانگی ست گرسنگی

Ки хотири уқалоро зҷон малол диҳад

که خاطرِ عقلا را زجان ملال دهد

Касе ба пои риёзат бар осмон нарасад

کسی به پایِ ریاضت بر آسمان نرسد

Вагар мисли чу замини тан дар эҳтимол диҳад

و گر مثل چو زمین تن در احتمال دهد

Заволи умру камоли бақо ба тоъат нест

زوالِ عمر و کمالِ بقا به طاعت نیست

Ба бхшшист ки тавфиқ лоязол диҳад

به بخششیست که توفیقِ لایزال دهد

Нзорёи мада аз дасти ҷоми моломол

نزاریا مده از دست جامِ مالامال

Ҷаҳон махӯр ки фалаки зуди пой мол диҳад

جهان مخور که فلک زود پای مال دهد

Сабӯҳи маҳзи фаризаи сети хосса дар шаби ид

صبوح محضِ فریضه ست خاصه در شبِ عید

Чунон ки вақти намозати фироқ бол диҳад

چنان که وقتِ نمازت فراغِ بال دهد