Ёр бо мо на чунон буд ки ҳар бор дигар
یار با ما نه چنان بود که هر بارِ دگر
Тарк мо кард гирифтаи сети магари ёр дигар
ترک ما کرد گرفتهست مگر یارِ دگر
Ваъдаи васл ҳаме дод ва намекард вафо
وعدۀ وصل همیداد و نمیکرد وفا
Дошт ҳар рӯз биёроста бозор дигар
داشت هر روز بیاراسته بازارِ دگر
Гуфта буд аз маниши ин бор дарӣ накушояд
گفته بود از منش اینبار دری نگشاید
Гӯ бирав аз паии ёрӣ дигару кор дигар
گو برو از پیِ یاری دگر و کارِ دگر
Аз худо шарм надорад ки раво ме дорад
از خدا شرم ندارد که روا میدارد
Ҳар нафас бар тани ранҷури ман озор дигар
هر نفس بر تنِ رنجورِ من آزارِ دگر
Май рӯми домани дили чоку гиребони висол
میروم دامنِ دلچاک و گریبانِ وصال
То куҷо ва кӣ ва чун даст диҳад бор дигар
تا کجا و کی و چون دست دهد بارِ دگر
Ман ба сад ҷавр аз ӯ рӯй напечам гарчи
من به صد جور از او روی نپیچم گرچه
Ҳаркас аз рӯй дигар мекунад инкор дигар
هرکس از رویِ دگر میکند انکارِ دگر
Зории зори нзории бикунади ҳам асарӣ
زاریِ زارِ نزاری بکند هم اثری
Зортар худ з нзорӣ набӯд зор дигар
زارتر خود ز نزاری نبود زارِ دگر