Ҳаргиз гумон мабар ки кунам бо ту дил дигар
هرگز گمان مبر که کنم با تو دل دگر
Бо ту бар он серум ки барам дӯстӣ ба сар
با تو بر آن سرم که برم دوستی به سر
Моро ба ихтилофи замон илтифот нест
ما را به اختلافِ زمان التفات نیست
Бар мо ба ҳеҷ нақси маваддат гумон мабар
بر ما به هیچ نقصِ مودّت گمان مبر
На на равои мадор ки баъд аз вафои аҳд
نهنه روا مدار که بعد از وفایِ عهد
Ҳаргиз кунад хилофии ту бар хотирами гузар
هرگز کند خلافی تو بر خاطرم گذر
Гар иқтизоӣ давр кунад ҳафтае хилоф
گر اقتضایِ دور کند هفتهای خلاف
Тшниъ бар қазо натавон зад бад-ӣни қадар
تشنیع بر قضا نتوان زد بدین قدر
Дар боби арзи бандагии ?утгар муқассирам
در بابِ عرضِ بندگی ات گر مقصّرم
Он ба ки бо мушоҳида андозам ин смр
آن به که با مشاهده اندازم این سمر
Бо лутф худ бигӯӣ ки чун зобтдои маро
با لطفِ خود بگوی که چون زابتدا مرا
Кардӣ қабули бози мгири охири он назар
کردی قبول باز مگیر آخر آن نظر
То ҳосидон гӯйанд аз бе қадами гурез
تا حاسدان گویند از بیقدم گریز
То тоънони нгўинд аз бе вафои ҳазар
تا طاعنان نگویند از بیوفا حذر
Рӯйу риё на кори муҳибон содиқ аст
روی و ریا نه کارِ محبّانِ صادق است
Ҳар ҷо муҳаббатаст дил аз дил диҳад хабар
هر جا محبّت است دل از دل دهد خبر
Гар банди банд боз гушойанд чун қабоаш
گر بند بند باز گشایند چون قباش
Содиқ чу кӯҳи баста буд дар вафои камар
صادق چو کوه بسته بود در وفا کمر
Солики дарин манозилу мрҳл касе буд
سالک درین منازل و مرحل کسی بود
Каз хештан ба пой иродат кунад сафар
کز خویشتن به پای ارادت کند سفر
Ореи нзорёи ман ва мо чист ҷузи ҳиҷоб
آری نزاریا من و ما چیست جز حجاب
Аз хештан ба дар шӯ ва аз худ ба дар нигар
از خویشتن به در شو و از خود به در نگر
То бар ту бози сӯрат фитрат шавад аён
تا بر تو باز صورتِ فطرت شود عیان
Вази барзахи мухайялаи беруни шӯии магар
وز برزخِ مخیّله بیرون شوی مگر
Моиему дӯстии ғам душман наме хӯрем
ماییم و دوستی غمِ دشمن نمیخوریم
Май мехӯрем на ғами ту низ ғам махӯр
مَی میخوریم نه غم تو نیز غم مخور