Рӯзӣ ба мо раҷъат кунад он муштарии симои магар
روزی به ما رجعت کند آن مشتری سیما مگر
Ҳам бози пурсади оқибат аз мо бути зебои магар
هم باز پرسد عاقبت از ما بتِ زیبا مگر
Бо мо намеуфтад магари моро бияфканад аз назар
با ما نمیافتد مگر ما را بیفکند از نظر
ё хоиФаст аз душманон ё шуд малул аз мо магар
یا خایف است از دشمنان یا شد ملول از ما مگر
Беҳуда ҷонӣ мекунам дилро тасаллӣ май даҳум
بیهوده جانی میکنم دل را تسلی میدهم
Ҳар рӯз гӯям сабр кун корӣ шавад фардои магар
هر روز گویم صبر کن کاری شود فردا مگر
Май буд вақте мӯнисами ман баъд манъам ме кунад
میبود وقتی مونسم من بعد منعم میکند
Нпснддм дар дасти ғами охири чунин танҳо магар
نپسنددم در دستِ غم آخر چنین تنها مگر
Боди саборо гуфтаам то пеш ӯ зорӣ кунад
بادِ صبا را گفتهام تا پیشِ او زاری کند
Бар ёд ӯ ҳар субҳи дам рухсат диҳад саҳбои магар
بر یادِ او هر صبحدم رخصت دهد صهبا مگر
Талхаст май каз хосият дар шӯр май оради маро
تلخ است مِی کز خاصیت در شور میآرد مرا
Ширини ман зон менад абрӯи турш оё магар
شیرینِ من زان میند ابرو ترش آیا مگر
Ҳар лаҳза сафро мекунад аз шӯри он ширини лабам
هر لحظه صفرا میکند از شورِ آن شیرینلبم
Фарҳодро ширин аз он кардааст дар сафрои магар
فرهاد را شیرین از آن کردهاست در صفرا مگر
Ҳайҳот агар оради сабои буии арақи чинаш ба мо
هیهات اگر آرد صبا بویِ عرقچینش به ما
Ҳам боди азин мӯъҷиз кунад амвотро эҳёи магар
هم باد ازین معجز کند اموات را احیا مگر
Дил бар бало биниҳодаам тан дар маломат дода ам
دل بر بلا بنهادهام تن در ملامت دادهام
Бошад ки ӯ ёд оварад рӯзии нзориро магар
باشد که او یاد آورد روزی نزاری را مگر