Маро ки даст ба рӯй хиради ниҳодами боз

مرا که دست به روی خرد نهادم باز

Ба тараот дигар мштғл надорад боз

به تَرهاتِ دگر مشتغل ندارد باز

Турои зи ман чаҳ хабар дар мақоми ваҷд ки дард

ترا ز من چه خبر در مقام وجد که درد

Ба ҳазрати мулкӣ май барам ки донад роз

به حضرت ملکی می‌برم که داند راز

НФози амр ба ҷузи ишқро мусаллам нест

نفاذِ امر به جز عشق را مسلم نیست

Чаҳ бонги чанг ба наздики кар чаҳ бонги намоз

چه بانگ چنگ به نزدیک کر چه بانگ نماز

Ба ҳарзаи умри гарон моя мекунӣ зойеъ

به هرزه عمر گران مایه می‌کنی ضایع

Макун ки марги яқини беҳтар аз ҳаёти муҷоз

مکن که مرگ یقین بهتر از حیات مجاز

Аннан ба мураккаби тавсани мадаи магар ба ҳисоб

عنان به مرکب توسن مده مگر به حساب

Ба чксаҳ боз наёяд чу авҷ гирад боз

به چکسه باز نیاید چو اوج گیرد باز

Азин нишеби нишемани талаби гузар ки магар

ازین نشیب نشیمن طلب گذر که مگر

Бар ошиёнаи ваҳдати парӣ ба боли ниёз

بر آشیانهٔ وحدت پری به بال نیاز

Бар остонӣ ва бо расатон нае ҳайҳот

بر آستانی و با راستان نه‌ای هیهات

Агар ба сим нае мултафит чу зари мгдоз

اگر به سیم نه‌ای ملتفت چو زر مگداز

Ба хештан чаҳ шӯии мъҷб эй муҷози параст

به خویشتن چه شوی معجب ای مجاز پرست

Сиррӣ ба даст ки онгоҳи гардании бФроз

سری به دست که آنگاه گردنی بفراز

Мусоҳибии талаби андари масолики таҳқиқ

مصاحبی طلب اندر مسالک تحقیق

Ки ҷониби ту риоят кунад ба сад эъзоз

که جانب تو رعایت کند به صد اعزاز

Агар зи пой дар оеи з даст нагузорад

اگر ز پای در آیی ز دست نگذارد

Вагар з чашм беафтӣ назар нагирад боз

و گر ز چشم بیفتی نظر نگیرد باز

Нзорёи назар аз аҳли рӯзгори бабр

نزاریا نظر از اهل روزگار ببر

Ба сабр ху кун ва бо дарди хештан май соз

به صبر خو کن و با درد خویشتن می‌ساز