Моро ба доми ишқи дроФкнди дидаи боз

ما را به دام عشق درافکند دیده باز

Бории нкрдмӣ ба каси ин шӯхи дидаи боз

باری نکردمی به کس این شوخ دیده باز

Бе чораи дили зи дида гирифтор ме шавад

بی‌چاره دل ز دیده گرفتار می‌شود

эй дида чанд гӯямат охири назари мбоз

ای دیده چند گویمت آخر نظر مباز

Дил худ бирафт ва ҷон баравад низ ломҳол

دل خود برفت و جان برود نیز لامحال

Онҷо ки аз назар наравад ҳеҷ эҳтироз

آنجا که از نظر نرود هیچ احتراز

Оре чаҳ дил чаҳ сар ки ҳамаи коинот ро

آری چه دل چه سر که همه کاینات را

Миқдор нест дар назари ёри поки боз

مقدار نیست در نظر یار پاک باز

Дар ишқ фитна бошад ва дар ақли офият

در عشق فتنه باشد و در عقل عافیت

Оре вале куҷо ба ҳақиқат расад муҷоз

آری ولی کجا به حقیقت رسد مجاز

Айбу ҳунар яке нашавад пеши муддаӣ

عیب و هنر یکی نشود پیش مدعی

То нанигарад ба дидаи Маҳмӯд дар Аёз

تا ننگرد به دیدهٔ محمود در ایاز

Мо ҳамчуи ҳалқа бар дарави хуш дар ҳарами рақиб

ما همچو حلقه بر درو خوش در حرم رقیب

Ҳайфаст дасти мардуми кӯтаҳи назари дароз

حیف است دست مردم کوته نظر دراز

Гуфтам ки бо фироқ шикоят кунам зи васл

گفتم که با فراق شکایت کنم ز وصل

Ҳаргиз ки кард синаи душмани маҳали роз

هرگز که کرد سینهٔ دشمن محلِّ راز

Сад сола аз мутолиаи хулд хуш тараст

صد ساله از مطالعهٔ خلد خوش‌ترست

Як лаҳза дар мушоҳидаи ёри дили навоз

یک لحظه در مشاهدهٔ یار دل نواز

Машриқи зи қибла боз надонам ки дар хаёл

مشرق ز قبله باز ندانم که در خیال

Мустағриқам чаҳ гӯна ба масҷид барам намоз

مستغرقم چه گونه به مسجد برم نماز

Ман худ ба ҷони дӯст ки ҳаргиз нахостам

من خود به جان دوست که هرگز نخواستم

Аз бе ниёзи ҳуру қусӯру Наиму ноз

از بی‌نیاز حور و قصور و نعیم و ناز

Пар кун қадаҳ бидиҳ ба нзорӣ ки масти ишқ

پر کن قدح بده به نزاری که مست عشق

Аз дӯзах эминасту зи фирдавс бе ниёз

از دوزخ ایمن است و ز فردوس بی‌نیاز