Ҳануз агарчӣ ҷафои дида май рӯми зи буриш

هنوز اگرچه جفا دیده می روم ز برش

Вафо кунам ба ду чашм аз миёни ҷон ба сараш

وفا کنم به دو چشم از میانِ جان به سرش

Чунон ки ташнаи зи оби ҳаёти ншкибд

چنان که تشنه ز آبِ حیات نشکیبد

Наме шикебам аз он моилам ба хок дараш

نمی شکیبم از آن مایلم به خاک درش

Гарм ба тири ҷафо хаста кард бокӣ нест

گرم به تیرِ جفا خسته کرد باکی نیست

Ба теғ боз нигарадам з рӯй чун сипараш

به تیغ باز نگردم ز رویِ چون سپرش

Ба нафхи сувар чаҳ ҳоҷати маро ки бархезам

به نفخِ صور چه حاجت مرا که برخیزم

Агар ба хок фурӯ гуядам касе хабараш

اگر به خاک فرو گویدم کسی خبرش

Маи ду ҳафта ки бошад ки офтоби мунир

مهِ دو هفته که باشد که آفتابِ منیر

Раво буд ки равад ҳам чу соя бар асараш

روا بود که رود هم چو سایه بر اثرش

Дили заъиф чаҳ бошад ҳазор ҷони азиз

دلِ ضعیف چه باشد هزار جانِ عزیز

Ба як киришма баранд он ду чашми шева гараш

به یک کرشمه برند آن دو چشمِ شیوه گرش

Машоми боди сабои машки буи кӣ будӣ

مشامِ بادِ صبا مشک بوی کی بودی

Агар набӯдӣ бар чини зулф ӯ гузариш

اگر نبودی بر چینِ زلفِ او گذرش

Ҳазор сӯфии софӣ на ҳам чу ман риндӣ

هزار صوفیِ صافی نه هم چو من رندی

зи роҳи дайни бабради илтифоти як назараш

ز راهِ دین ببرد التفاتِ یک نظرش

Нзорёи туу зорӣ хилоф ме гӯйанд

نزاریا تو و زاری خلاف می گویند

Ки ҷуз ба зар натавон кард даст дар камараш

که جز به زر نتوان کرد دست در کمرش