Зулоли Хизру шаби хилвату ҳарифи мувофиқ

زلالِ خضر و شبِ خلوت و حریفِ موافق

Ва ан икод бихон дафъи чашми захми мунофиқ

وَ اِن یَکاد بخوان دفعِ چشم زخمِ منافق

Шабӣ ки рашк бирав рӯзи иди бараду аҷаби ин

شبی که رشک برو روز عید برد و عجب این

Ки шуд замонаи мғнии вақту бахти мувофиқ

که شد زمانه مغنّیِ وقت و بخت موافق

Чу ишқ дод паноҳат ба бодбони аноят

چو عشق داد پناهت به بادبانِ عنایت

зи роҳи мартаба бар сидраи каши таноби сродқ

ز راهِ مرتبه بر سدره کش طنابِ سرادق

з ман мадоред эй оқилон ба хайри таваққуъ

ز من مدارید ای عاقلان به خیر توقّع

Агар хилоф хирад мекунам ки мастаму ошиқ

اگر خلافِ خرد می کنم که مستم و عاشق

Касе ки хӯрд зи хами хонаи муҳаббат ӯ май

کسی که خورد ز خُم خانۀ محبّتِ او می

Ба хеш боз наёяд ба ҳукми фитрати собиқ

به خویش باز نیاید به حکمِ فطرتِ سابق

Ба ишқи ҳеҷ таъаллуқ надошт қиссаи ромин

به عشق هیچ تعلّق نداشت قصّۀ رامین

Ба ақл низ чаҳ нисбат кунад фасонаи Вомиқ

به عقل نیز چه نسبت کند فسانۀ وامق

Чаҳ илтифот ба ҳолоти мустаҳили муҳиқ ро

چه التفات به حالاتِ مستحیلِ محق را

Ки аз замону макон фориғанд аҳли ҳақоиқ

که از زمان و مکان فارغ اند اهلِ حقایق

Муҳӣт бар лак поем намерасад ба маротиб

محیط بر لکِ پایم نمی رسد به مراتب

Ғадири ?дане ва он гуҳи ману ғариқи алойиқ

غدیر دنیی و آن گه من و غریقِ علایق

зи коиноти ману хирқаеу кунҷӣу обӣ

ز کاینات من و خرقه ای و کُنجی و آبی

Ки доғ кард чу оташ ба акси ранги шақоӣқ

که داغ کرد چو آتش به عکس رنگِ شقایق

Бихон ва ман самароти алнхилу алоъноб аз

بخوان وَ مِن ثُمُراتِ النَّخیلِ و الاّعناب از

Китоби манзили коўрди Мустафо ба хилоиқ

کتابِ مُنزَل کآورد مصطفی به خلایق

Ба ҳукми ттхдўни шира май ситонам аз аъноб

به حکم تُتٌخِدُون شیره می ستانم از اعناب

Ҳамеша мастам ва бо ояти саҳеҳу мувофиқ

همیشه مستم و با آیتِ صحیح و موافق

Дурусту рост баён мекунаму ҳмдои ллаҳ

درست و راست بیان می کنم و حَمداً للهِ

Чу ровӣони мунофиқ на козибем ва на сориқ

چو راویانِ منافق نه کاذبیم و نه سارق

Бар ихтилофи тасарруфкунандагон чаҳ мъўл

بر اختلافِ تصرّف کنندگان چه معوَّل

Агар маҷол қабуласт баси ривояти содиқ

اگر مجالِ قبول است بس روایتِ صادق

Нзорёи гуҳари ақл дар хлоби ҷаҳолат

نزاریا گهرِ عقل در خلابِ جهالت

Ба ҳасби ҳоли ту чун дар хур омадааст ва чаҳ лоиқ

به حسبِ حالِ تو چون در خور آمده است و چه لایق

Макуш бо мутаъассиб ки дар ҳиҷоб бимонада

مکوش با متعصّب که در حجاب بمانده

Ба ҳуҷҷати ту бурун ноед аз мзиқи ъўоиқ

به حجّتِ تو برون ناید از مضیقِ عوایق