Гузашти умри гиромӣ дар интизори висол
گذشت عمرِ گرامی در انتظارِ وصال
Дареғи суҳбати ёрону рӯзгори висол
دریغ صحبتِ یاران و روزگارِ وصال
Дареғ нест дилам дар азоби ҳиҷри дареғ
دریغ نیست دلم در عذابِ هجر دریغ
Ки ҷуз дареғ намонда сети ёдгори висол
که جز دریغ نمانده ست یادگارِ وصال
Шуд он замона ки дар пои мол буд фироқ
شد آن زمانه که در پای مال بود فراق
Кунун ба даст фироқаст ихтиёри висол
کنون به دستِ فراق است اختیارِ وصال
Ду мушкиласт миёни ду хасми рӯёрӯӣ
دو مشکل است میانِ دو خصم رویاروی
Ки бахти ёр фироқасту ҷаҳди ёри висол
که بخت یارِ فراق است و جهد یارِ وصال
Азоби маҳшари ҳиҷрон қиёматӣ дигараст
عذابِ محشرِ هجران قیامتی دگرست
На халқро ба қиёмат буд қарори висол
نه خلق را به قیامت بود قرارِ وصال
Чаҳ рӯз буд ки ҳиҷрон сиёҳ кард чу шаб
چه روز بود که هجران سیاه کرد چو شب
Ҷаҳони равшан бар чашмам аз ғубори висол
جهانِ روشن بر چشمم از غبارِ وصال
Ба сад забон ба замонии ҳазор шукр кунам
به صد زبان به زمانی هزار شکر کنم
Агар ба хоби бубинами дамии канори висол
اگر به خواب ببینم دمی کنارِ وصال
Чу эҳтимол намедорам интиқоми фироқ
چو احتمال نمی دارم انتقامِ فراق
Чаҳ гӯна дар нгризм ба зинҳор висол
چه گونه در نگریزم به زینهارِ وصال
Нзорё ба қазои фироқ розӣ бош
نزاریا به قضایِ فراق راضی باش
Ки ҷузи шароб ризо нашканад хумори висол
که جز شرابِ رضا نشکند خمارِ وصال