Ҳазор шукр ки баргаштам аз сафар ба мақом

هزار شکر که برگشتم از سفر به مقام

Ба рағми душманӣ ва дидам ҷамоли дӯст ба ком

به رغمِ دشمنی و دیدم جمالِ دوست به کام

Дигар муҷоҳидаи ғурбатам ҳавас накунад

دگر مجاهده غربتم هوس نکند

Ки дар мушоҳидаи дӯстон хушаст мудом

که در مشاهده دوستان خوش است مدام

Чу аз қиёмати рӯзи видоъи ёди орм

چو از قیامتِ روزِ وداع یاد آرم

Арақи зи ҳайбати онам фурӯ чакад зи мсом

عرق ز هیبتِ آنم فرو چکد ز مسام

Ба дарди дили назарӣ аз пасу раҳе дар пеш

به دردِ دل نظری از پس و رهی در پیش

Чунон ки бодияи шавқи ишқ бе анҷом

چنان که بادیه شوقِ عشق بی‌انجام

Ҳазор нома сияҳ кардаам ба дӯдаи дил

هزار نامه سیه کرده‌ام به دوده دل

Ба дасти бод сабо додаам алоами алоам

به دستِ باد صبا داده‌ام اُلام اُلام

Ҷафои чарху азоб сафар мапурс аз ман

جفای چرخ و عذابِ سفر مپرس از من

Чаҳ гӯямат ки чаҳ омад ба рӯем аз айём

چه گویمت که چه آمد به رویم از ایّام

Шикоятӣ ки ман аз рӯзгор дорам ҳам

شکایتی که من از روزگار دارم هم

Ба рӯзгор ҳикоят кунам алии алотмом

به روزگار حکایت کنم علی الاتمام

Ба зӯру зорӣ агар бе ту бода Эй хӯрдам

به زور و زاری اگر بی تو باده‌ای خوردم

Ҳалоли зода неам гар нагуфтаам ки ҳаром

حلال‌زاده نی ام گر نگفته‌ام که حرام

Хумори мардуми ошиқи з бода нанишинад

خمارِ مردم عاشق ز باده ننشیند

Ки дард ишқ нагирад ба дард май ором

که دردِ عشق نگیرد به دُردِ می آرام

Ба маҷлисӣ ки дарафтод ме надонистам

به مجلسی که درافتاد می‌ندانستم

Ки заҳр мехӯрам аз ғусса ё шароб аз ҷом

که زهر می‌خورم از غصّه یا شراب از جام

Ба буии дӯсти чунон маст ва бехабар будам

به بویِ دوست چنان مست و بی‌خبر بودم

Ки ҳоҷат май ва мускир набӯду атри машом

که حاجتِ می و مسکر نبود و عطرِ مشام

Самоъи мутрибу бонги намоз фарқ надошт

سماعِ مطرب و بانگِ نماز فرق نداشت

Ба гӯши ман ки мухолифи кадому рости кадом

به گوشِ من که مخالف کدام و راست کدام

Ба ихтиёри нзорӣ дигар сафар накунад

به اختیار نزاری دگر سفر نکند

Ки эҳтиёт кунад мурғи захми хӯрдаи зи дом

که احتیاط کند مرغِ زخم‌خورده ز دام