Дардо каз иштиёқи ту ҷоно бсухтам

دردا کز اشتیاقِ تو جانا بسوختم

Дар оташи фироқ саропо бсухтам

در آتشِ فراق سراپا بسوختم

Саҳбои аниси хотири ман буд пеши азин

صهبا انیسِ خاطر من بود پیش ازین

Акнӯн ҳам аз ҳарорат саҳбо бсухтам

اکنون هم از حرارتِ صهبا بسوختم

Аз туфи синаи бас ки ҷигар хӯрдам аз лабат

از تّفِ سینه بس که جگر خوردم از لبت

Ёқӯт дар хазона хоро бсухтам

یاقوت در خزانۀ خارا بسوختم

Аз рашки ашки гавҳари поки саҳоби чашм

از رشکِ اشکِ گوهرِ پاکِ سحابِ چشم

Дар ҳуққаи садаф дар Байзо бсухтам

در حقّۀ صدف دُرِ بیضا بسوختم

Зад бар асири оташи оҳами вазони асар

زد بر اثیر آتشِ آهم وزان اثر

Ҳам чун асири ақд сурайё бсухтам

هم چون اثیر عقدِ ثریّا بسوختم

Бар оташами нишоне ва айбам кунӣ агар

بر آتشم نشانی و عیبم کنی اگر

Дастии бароварам ки худоё бсухтам

دستی برآورم که خدایا بسوختم

Оҷиз шудам чу сӯхта май хостии маро

عاجز شدم چو سوخته می خواستی مرا

Аз ғайрати ту дам наздам то бсухтам

از غیرتِ تو دم نزدم تا بسوختم

Фикрам дигар ба оби сухани раҳ наме барад

فکرم دگر به آبِ سخن ره نمی برد

Хотири чунон дар оташ савдо бсухтам

خاطر چنان در آتشِ سودا بسوختم

Дилро ба роҳи дидау ҷонро ба барқи шавқ

دل را به راه دیده و جان را به برقِ شوق

Инро ба об додам ва онро бсухтам

این را به آب دادم و آن را بسوختم

Номии нзорёи зи ту мондаи сету зоре

نامی نزاریا ز تو مانده ست و زاریی

Пас қисса чист гӯи ҳама аъзо бсухтам

پس قصّه چیست گو همه اعضا بسوختم