Шубон то ба саҳари гирди шаҳр май гирдам
شبانِ تا به سحر گردِ شهر می گردم
Касе накард азин бехудӣ ки ман кардам
کسی نکرد ازین بی خودی که من کردم
Ба ихтиёри гадои дил ба подшоҳ диҳад
به اختیار گدا دل به پادشاه دهد
Ба дасти худ чаҳ бало бо сар худ оварадам
به دستِ خود چه بلا با سر خود آوردم
Ғам намехӯрд он кас ки дар муҳаббат ӯ
غم نمی خورد آن کس که در محبّتِ او
Ҳазор шарбати хуноба ҷигар хӯрдам
هزار شربتِ خونابۀ جگر خوردم
Ба душманам чаҳ таваққуъ ки бегуноҳ аз дӯст
به دشمنم چه توقّع که بی گناه از دوست
намекунам гила аммо басии бёзрдм
نمی کنم گله امّا بسی بیازردم
Хаҷал намешавам аз таънаи фусурдаи дилон
خجل نمی شوم از طعنۀ فسرده دلان
Ба змҳрир намебошадӣ аҷаби сардам
به زمهریر نمی باشدی عجب سردم
Дилӣ чу оҳану чашмӣ чу санг ме нигаред
دلی چو آهن و چشمی چو سنگ می نگرید
Ки захми тир маломат намекунад дардам
که زخمِ تیرِ ملامت نمی کند دردم
Ба боздоштан аз кӯии дӯсти рағми маро
به بازداشتن از کویِ دوست رغمِ مرا
Рақиби даъвии дафъӣ дигар кунад ҳар дам
رقیب دعویِ دفعی دگر کند هر دم
Магар вуқуф надорад ки ман ба хилват ӯ
مگر وقوف ندارد که من به خلوتِ او
Чунон рӯм ки набинад магари сабои гирдам
چنان روم که نبیند مگر صبا گردم
Мухолифон ба ҷафогар маболиғати бикунанд
مخالفان به جفا گر مبالغت بکنند
Агар вафо накунам аҳди дӯсти номардум
اگر وفا نکنم عهدِ دوست نامردم
наме тавонам аз ӯ бозгашт агар корам
نمی توانم از او بازگشت اگر کارم
Ба ҷон расад ки ба хӯни дилаши бпрўрдм
به جان رسد که به خونِ دلش بپروردم
Ба эътиқоди нзорӣ ки бар нигарадам азу
به اعتقاد نزاری که بر نگردم ازو
Вагар ризо диҳад аз эътиқоди баргардам
وگر رضا دهد از اعتقاد برگردم