Дилами бабрад ва қарорам бирафту маъзӯрам
دلم ببرد و قرارم برفت و معذورم
Ки кард масти хароби он ду чашми махмурам
که کرد مستِ خراب آن دو چشمِ مخمورم
Бутӣ ки дар талаби васл ӯ чу мадҳушон
بتی که در طلبِ وصلِ او چو مدهوشان
Гарми сару дил ва тартиб нест маъзӯрам
گرم سر و دل و ترتیب نیست معذورم
Муқарараст ба наздики оқилони ҷаҳон
مقرّرست به نزدیکِ عاقلانِ جهان
Ки ман чу мардуми девона аз хиради даврам
که من چو مردمِ دیوانه از خرد دورم
зи тоби меҳри чунонам таб фироқ бсухт
ز تابِ مهر چنانم تبِ فراق بسوخت
Ки зортар зи ҷгртФтгони мҳрўрм
که زارتر ز جگرتفتگانِ محرورم
Ба сад шиканҷа барояд зи андаруни нафасам
به صد شکنجه برآید ز اندرون نفسم
Ки зери бори муҳаббат ҳамеша ранҷурам
که زیرِ بارِ محبّت همیشه رنجورم
Ба офтоб наёрам нигоҳ кард аз онк
به آفتاب نیارم نگاه کرد از آنک
Назар ба ҳар чаҳ кунам нозираст манзурам
نظر به هر چه کنم ناظر است منظورم
Санами пурситаму алҳмдллаҳ аз сари ҷаҳл
صنم پرستم و الحمدلله از سرِ جهل
На чун муқаллиди днёпрсти мағрурам
نه چون مقلّدِ دنیاپرستِ مغرورم
Дилам сиёҳ шуд аз зулмати шаби ҳиҷрон
دلم سیاه شد از ظلمتِ شبِ هجران
Ки ҳамчуи сояи ҷудои аўФтодаҳ аз наварам
که همچو سایه جدا اوفتاده از نورم
На саҳв рафт ки аз иқтибоси нури хаёл
نه سهو رفت که از اقتباسِ نورِ خیال
Шавад чу рӯзи мунаввари шубони диҷўрм
شود چو روز منوّر شبانِ دیجورم
Гарм ба нур ишорат кунанд вагар ба зулм
گرم به نور اشارت کنند وگر به ظُلَم
Ба ҳар тариқа ки фармон диҳанд маъмурам
به هر طریقه که فرمان دهند مامورم
Ба ҳукми ишқи камӣн бандаам нзории ном
به حکمِ عشق کمین بندهام نزاری نام
Агар ба мартаба дар малики шоҳи дастурам
اگر به مرتبه در ملکِ شاه دستورم