Дил гум карда ӣ худро з куҷо ме ҷӯям
دل گم کردهی خود را ز کجا میجویم
Рӯзу шаб дар талабаши гирди ҷаҳон май пўим
روز و شب در طلبش گرد جهان میپویم
Магар аз оҳи дил сӯхта ёбам асарӣ
مگر از آهِ دلِ سوخته یابم اثری
Ҳар куҷо май расм аз хок ҳаво ме бӯем
هر کجا میرسم از خاک هوا میبویم
То магар зу хабарӣ ёбаму бӯеи шинавам
تا مگر زو خبری یابم و بویی شنوم
Ғами дил бо ҳамаи кас май рӯм ва ме гӯям
غمِ دل با همه کس میروم و میگویم
Худ сар аз пеш наёрам зи хиҷолати бардошт
خود سر از پیش نیارم ز خجالت برداشت
Ки бабради оташи ин ҳодисаи об аз рӯем
که ببرد آتشِ این حادثه آب از رویم
Бар дили шефтаи охир чаҳ маломат ки ҳануз
بر دلِ شیفته آخر چه ملامت که هنوز
Ба ҳаваси майл назар меравад аз ҳар сӯем
به هوس میل نظر میرود از هر سویم
Манам акнӯну нзорӣ ба зории зорӣ
منم اکنون و نزاریِ به زاری زاری
Ки на зӯраст ва на зар дар каф ва дар бозуем
که نه زورست و نه زر در کف و در بازویم