Саҳари соқӣ дар майхона во кард

سحر ساقی در میخانه وا کرد

зи ҷомии коми михўорон раво кард

ز جامی کام میخواران روا کرد

зи лаби миноӣ майро меҳри бардошт

ز لب مینای می را مهر برداشت

Лаболаби соғарӣ дар ком мо кард

لبالب ساغری در کام ما کرد

Шароби бирёи чандон ба паймӯд

شراب بیریا چندان به پیمود

Ки ҷонрои мутлақ аз қайд риё кард

که جانرا مطلق از قید ریا کرد

Дилам каз манзили кибр ва риё хост

دلم کز منزل کبر و ریا خاست

Нишеман дар ҳарим кибриё кард

نشیمن در حریم کبریا کرد

Даромад аз дарони моҳи дили афрӯз

درآمد از درآن ماه دل افروز

зи меҳраши хилвати дил бо сафо кард

ز مهرش خلوت دل با صفا کرد

Бадали дардӣ ки мебудам зи ҳиҷрон

بدل دردی که میبودم ز هجران

зи дорухонаи васлаш даво кард

ز داروخانه وصلش دوا کرد

Марои нури алӣ чун тофт дар дил

مرا نور علی چون تافت در دل

зи худ бегона бо ҳақ ошно кард

ز خود بیگانه با حق آشنا کرد