Дӯшами ғами ту малики сувидои гирифта буд

دوشم غم تو ملک سویدا گرفته بود

Дӯдами зи синаи роҳи сурайёи гирифта буд

دودم ز سینه راه ثریا گرفته بود

Ҷонро з рӯй лаъли ту дар танги омада

جان را ز روی لعل تو در تنگ آمده

Дилро зи шавқи зулфи ту савдои гирифта буд

دل را ز شوق زلف تو سودا گرفته بود

Медид шамъ дар ман ва месӯхт то ба рӯз

میدید شمع در من و میسوخت تا به روز

Зони оташӣ ки дар ман шайдои гирифта буд

زآن آتشی که در من شیدا گرفته بود

Аз дидаам хаёли ту маҳрӯми гашти боз

از دیده‌ام خیال تو محروم گشت باز

КотроФи хонааш ҳамаи дарёи гирифта буд

کاطراف خانه‌اش همه دریا گرفته بود

Мехост хуррамӣ ки кунад дар дилами ватан

میخواست خرمی که کند در دلم وطن

То ӯ расед лашгари ғами ҷои гирифта буд

تا او رسید لشگر غم جا گرفته بود

Сабр аз барам рамеду маро биқрор кард

صبر از برم رمید و مرا بیقرار کرد

Гўӣии магар ки хотираш аз мо гирифта буд

گوئی مگر که خاطرش از ما گرفته بود

Мискини убайдро ғам ишқат бикушт аз онк

مسکین عبید را غم عشقت بکشت از آنک

ӯро ғариби дида ва танҳо гирифта буд

او را غریب دیده و تنها گرفته بود