Сабоҳи ид ки дар такяи гоҳи нозу Наим
صباح عید که در تکیه گاه ناز و نعیم
Гадо кулоҳ намад каҷи ниҳод ва шаҳ дияем
گدا کلاه نمد کج نهاد و شه دیهیم
Нишоти табъи бҳдӣ ки нашунӯд доно
نشاط طبع بحدی که نشنود دانا
Биҷузи таронаи атфолу тараоти надим
بجز ترانه اطفال و ترهات ندیم
Бисоти маҷлиси даҳри ончунон нишоти Омуад
بساط مجلس دهر آنچنان نشاط آمود
Ки дастро бсмоъ остин диҳад таълим
که دست را بسماع آستین دهد تعلیم
Брози мъонқаҳи нози кони блмси шуҷоъ
براز معانقه ناز کان بلمس شجاع
Лаб аз мсоҳФаҳ шоҳидон бабўса Карим
لب از مصاحفه شاهدان ببوسه کریم
Навой марсияи савму шодӣонаи ид
نوای مرثیه صوم و شادیانه عید
Кушод аз асари инбисоти гӯши самим
گشاد از اثر انبساط گوش صمیم
Бихон моида шуд дасти иштиҳо , мутлақ
بخوان مائده شد دست اشتها ، مطلق
Бкому меъда адоват фузуд табъи лӣим
بکام و معده عداوت فزود طبع لئیم
Бичишам ва ҳам зи файзи шукуфтаи рӯеи даҳр
بچشم و هم ز فیض شکفته رویی دهر
Намӯд чеҳра умед дошт , сӯрати бим
نمود چهره امید داشت ، صورت بیم
Ҷаҳони чунин хуш ва ман хуштар аз ҷаҳони бўсоқ
جهان چنین خوش و من خوشتر از جهان بوثاق
Нишаста бо хиради андари тааллуму таълим
نشسته با خرد اندر تعلم و تعلیم
Ки ногаҳони зи дирам дар расед муждаи диҳӣ
که ناگهان ز درم در رسید مژده دهی
Чунонкӣ аз чамани толеъами бмғзи шамем
چنانکه از چمن طالعم بمغز شمیم
Чаҳ гуфт ? гуфт ки эй махзани ҷавоҳири қудс
چه گفت ؟ گفت که ای مخزن جواهر قدس
Чаҳ гуфт ? гуфт ки эй матлаби биҳишти Наим
چه گفت؟ گفت که ای مطلب بهشت نعیم
Биё ки аз гуҳарат ёд мекунад дарё
بیا که از گهرت یاد می کند دریا
Биё ки ташнаи лабатро талаб кунад таснӣм
بیا که تشنه لبت را طلب کند تسنیم
Зулоли чашмаи умеди пӯри Акбари шоҳ
زلال چشمه امید پور اکبر شاه
Тарози давлати ҷовиди шоҳзодаи салим
طراز دولت جاوید شاهزاده سلیم
Азин паём дилам шуд шукуфтау шодоб
ازین پیام دلم شد شکفته و شاداب
Чунонкии боғи зшбнм , чунонкии гули знсим
چنانکه باغ زشبنم ، چنانکه گل زنسیم
Барра фитодам вгштми чунон штобздаҳ
بره فتادم وگشتم چنان شتابزده
Ки дасти аҳли карам дар нисори гавҳару сим
که دست اهل کرم در نثار گوهر و سیم
Чу рӯзгори расидами бдргҳӣ ки кунад
چو روزگار رسیدم بدرگهی که کند
Замонаи тўФ ҳаримаш бидида таъзим
زمانه طوف حریمش بدیده تعظیم
Расӣдан ману иқболи он ҳумоюни фол
رسیدن من و اقبال آن همایون فال
Чунон фитод мутобиқ дар он хуҷастаи ҳарим
چنان فتاد مطابق در آن خجسته حریم
Ки гродб накашидӣ Аннани ман , қадамаш
که گرادب نکشیدی عنان من ، قدمش
Бабўса гоҳ ҳаме кард бар лабами тақдим
ببوسه گاه همی کرد بر لبم تقدیم
Маро чу дӯш бадуш адаб бидид устод
مرا چو دوش بدوش ادب بدید استاد
БлтФи хос бадал кард илтифоти ъмим
بلطف خاص بدل کرد التفات عمیم
Румузи курнришу таслимро адо кардам
رموز کرنش و تسلیم را ادا کردم
Бдأби мардуми доно на базлаи санҷ , надим
بدأب مردم دانا نه بذله سنج ، ندیم
Чаҳ гӯямат ки бкомм чаҳ моя лиззат дод
چه گویمت که بکامم چه مایه لذت داد
Гузидаи нўбркрнши намаки чаши таслим
گزیده نوبرکرنش نمک چش تسلیم
Нагуфт ва ман башнавадам ҳар ончӣ гуфтан дошт
نگفت و من بشنودم هر آنچه گفتن داشت
Ки дар баён нигаҳаш кард бар забони тақдим
که در بیان نگهش کرد بر زبان تقدیم
Лабаш чу навбати хеш аз нигоҳ боз гирифт
لبش چو نوبت خویش از نگاه باز گرفت
Фитод сомъаҳ дар мавҷи кавсару таснӣм
فتاد سامعه در موج کوثر و تسنیم
Биханда гуфт ки дар узри ин гуноҳи бузург
بخنده گفت که در عذر این گناه بزرگ
Ки рафтаи номи ту бе ҳукми мо бҳФти иқлӣм
که رفته نام تو بی حکم ما بهفت اقلیم
Ҳамин ки рафтӣ азин остон навишта биор
همین که رفتی ازین آستان نوشته بیار
Гузидаи нусхае аз зодҳои табъи салим
گزیده نسخه ای از زادهای طبع سلیم
Азин сухани сарви дастори ман гулистон шуд
ازین سخن سرو دستار من گلستان شد
зи бскаҳи чидам ва бар сар задам гули таслим
ز بسکه چیدم و بر سر زدم گل تسلیم
Чу бози гаштам аз он остон , хиради ҷузвӣ
چو باز گشتم از آن آستان، خرد جزوی
Навишта дод ки ин тӯҳфаи гул ва ту насим
نوشته داد که این تحفه گل و تو نسیم
Бигиру зуди бабр бо қасидае ки буд
بگیر و زود ببر با قصیده ای که بود
Бшоху барги сухани нусхаи риёзи Наим
بشاخ و برگ سخن نسخه ریاض نعیم
з ҷом шудам ки кадомин қасида бояд гуфт
ز جام شدم که کدامین قصیده باید گفت
Ба лаҳҷае ки дамади рӯҳ дар изом Ромем
به لهجهای که دمد روح در عظام رمیم