Ҳар ки ҳирсаш гом зад , комаши раво ҳаргиз нашуд
هر که حرصش گام زد، کامش روا هرگز نشد
Ҳар ки султон қаноат шуд , гадо ҳаргиз нашуд
هر که سلطان قناعت شد، گدا هرگز نشد
Коми ҷонами дармиёни обу оташ ҳозир аст
کام جانم درمیان آب و آتش حاضر است
Ҳар ки бо ҳиммат барояд бенаво ҳаргиз нашуд
هر که با همت برآید بینوا هرگز نشد
Бандаи тамкини дили гирдам ки дар роҳи вафо
بندهٔ تمکین دل گردم که در راه وفا
Сайли ғам ҳар чанд афзӯн шуд , зи ҷо ҳаргиз нашуд
سیل غم هر چند افزون شد، ز جا هرگز نشد
Неи ҳамин дил ёфтаст аз каъбаи ишқати сафо
نی همین دل یافتست از کعبهٔ عشقت صفا
Ҳар чаҳ дар ин чашмаи шастам бесафо ҳаргиз нашуд
هر چه در این چشمه شستم بی صفا هرگز نشد
Ҳаргизат дар дил наёяд кин парешони рӯзгор
هرگزت در دل نیاید کاین پریشان روزگار
Шармсор аз як нигоҳи ошно ҳаргиз нашуд
شرمسار از یک نگاه آشنا هرگز نشد
Бас ки ин дард аз ману дили душман осоиш аст
بس که این درد از من و دل دشمن آسایش است
Сад мараз ба гашти маҷнӯнро , шифо ҳаргиз нашуд
صد مرض به گشت مجنون را ، شفا هرگز نشد
Дар ҳавои порсое , урфӣ аз ҳар маъсият
در هوای پارسایی، عرفی از هر معصیت
Гашти сад раҳи тоиб , аммо порсо ҳаргиз нашуд
گشت صد ره تایب، اما پارسا هرگز نشد