Камони меҳри турои чарх чанбарӣ накушуд

کمان مهر ترا چرخ چنبری نکشد

Фурӯғ рӯй турои ҷурм муштарӣ накушуд

فروغ روی ترا جرم مشتری نکشد

Чунин ки чашми ту оҳанги дайн ман дорад

چنین که چشم تو آهنگ دین من دارد

Ҳадиси ман чаҳ кунад ?гар ба кофарӣ накушуд

حدیث من چه کند؟ گر به کافری نکشد

Ба гирди кӯии ту девонаи вор кӣ гирдам

به گرد کوی تو دیوانه‌وار کی گردم

Гарми каманди ду зулфи ту , эй парӣ , накушуд

گرم کمند دو زلف تو، ای پری، نکشد

Бидон сифат ки камар дар миён кашид туро

بدان صفت که کمر در میان کشید ترا

Миён мо аҷабаст ар ба доварӣ накушуд !

میان ما عجبست ار به داوری نکشد!

Гарм чу авд нахоҳӣ нишонд бар оташ

گرم چو عود نخواهی نشاند بر آتش

Ба боди гӯй ки : он зулф анбарӣ накушуд

به باد گوی که: آن زلف عنبری نکشد

Дилам ба ҷони ғами ишқ ту мекашад , то ҳаст

دلم به جان غم عشق تو میکشد، تا هست

Вале танами зи заъифӣ ва лоғарӣ накушуд

ولی تنم ز ضعیفی و لاغری نکشد

Ба васф рӯй мунири ту Авҳадии пас азин

به وصف روی منیر تو اوحدی پس ازین

СФинҳои бинависад , ки анварӣ накушуд

سفینها بنویسد، که انوری نکشد