То дили маҷрӯҳи ман ошиқи зор ту шуд
تا دل مجروح من عاشق زار تو شد
Ҳеҷ надидему умр дар сари кор ту шуд
هیچ ندیدیم و عمر در سر کار تو شد
Лаъли ту рӯзии марои ваъда васлӣ бидод
لعل تو روزی مرا وعدهٔ وصلی بداد
Фикрам азон рӯзи бози рӯзи шумор ту шуд
فکرم ازان روز باز روز شمار تو شد
Зинда буд ошиқӣ , каз ҳавас рӯй ту
زنده بود عاشقی، کز هوس روی تو
Бар сари кӯии ту мард , хоки диёр ту шуд
بر سر کوی تو مرد، خاک دیار تو شد
Субҳ чу ҳасан ту кард рӯй ба боғи офтоб
صبح چو حسن تو کرد روی به باغ آفتاب
Машғала аз раҳ баранд , машъалаи дор ту шуд
مشغله از ره براند، مشعلهدار تو شد
Аз сари хок дарат дӯши ғубории бхост
از سر خاک درت دوش غباری بخاست
Боди биҳишт он бидид , хоки ғубор ту шуд
باد بهشت آن بدید، خاک غبار تو شد
Таъна занад серумаро , чашм чу хок ту дид
طعنه زند سرمه را، چشم چو خاک تو دید
Шукр кунад захмро , дил ки шикор ту шуд
شکر کند زخم را، دل که شکار تو شد
Зумраи ушшоқро дар шаби дидори қурб
زمرهٔ عشاق را در شب دیدار قرب
Ҳар дилу ҷонӣ ки буд , ҷумлаи нисори тўшд
هر دل و جانی که بود، جمله نثار توشد
Шокирам аз дил , ки ӯ гашти шикорат , балӣ
شاکرم از دل، که او گشت شکارت، بلی
Шукр кунад захмро , дил ки шикор ту шуд
شکر کند زخم را، دل که شکار تو شد
Аз ҳамаи ганҷии Саиди вази ҳамаи ранҷии баъӣд
از همه گنجی سعید وز همه رنجی بعید
Гар ту ндонӣ ки кист ? ӯст ки ёр ту шуд
گر تو ندانی که کیست؟ اوست که یار تو شد
Зинда ҷовид монад , сикка иқбол ёфт
زندهٔ جاوید ماند، سکهٔ اقبال یافت
Сар ки фидои ту гашт , зар ки нисор ту шуд
سر که فدای تو گشت، زر که نثار تو شد
Сари зи хати Авҳадӣ бар нагирифт офтоб
سر ز خط اوحدی بر نگرفت آفتاب
То қалами фикр ӯ васфнигор ту шуд
تا قلم فکر او وصف نگار تو شد