Умрӣ ки на бо тести касаш умр нахонд

عمری که نه با تست کسش عمر نخواند

Онро ки ту дар доми кашии каси нрҳонд

آنرا که تو در دام کشی کس نرهاند

Гар бар тани маҷнӯни ту сад силсила бошад

گر بر تن مجنون تو صد سلسله باشد

Чун рух бинмое ҳама дар ҳам гусаланд

چون رخ بنمایی همه در هم گسلاند

Зини дили матлаби сабр , ки аз рӯй ту даврӣ

زین دل مطلب صبر، که از روی تو دوری

Мушкил битавон кардан ва ӯ худ натавонад

مشکل بتوان کردن و او خود نتواند

Аз толеъи худ бар сргнҷӣ биншинам

از طالع خود بر سرگنجی بنشینم

Рӯзӣ агарам бо ту ба кунҷӣ бинишонад

روزی اگرم با تو به کنجی بنشاند

Додам дили худро бадви чашми ту валикин

دادم دل خود را بدو چشم تو ولیکن

Кас нест ки аз чашм ту додам бастанд

کس نیست که از چشم تو دادم بستاند

Аз гардиши айёми таваққуъ на чунин буд

از گردش ایام توقع نه چنین بود

Кам заҳри фироқи ту чунин зуд чашонд

کم زهر فراق تو چنین زود چشاند

Дил буд ки аз воқеаи ман хабарӣ дошт

دل بود که از واقعهٔ‌من خبری داشت

Ва он ба ки худ ин воқеаи дил низ надонад

و آن به که خود این واقعه دل نیز نداند

Аз ғам натавонам ки нивисам сухани худ

از غم نتوانم که نویسم سخن خود

Вар низ нивисам сухани худ , ки расонад ?

ور نیز نویسم سخن خود، که رساند؟

Пиндор ки : сад нома ва қосид бифиристам

پندار که: صد نامه و قاصد بفرستم

Дар шаҳри шумо қиссаи дарвеш ки хонд ?

در شهر شما قصهٔ درویش که خواند؟

Дил дар лаби ширини ту басти Авҳадӣ , эй ҷон

دل در لب شیرین تو بست اوحدی، ای جان

Магузор ки айём ба талхӣ гузаронад

مگذار که ایام به تلخی گذراند