Кро бар ту фиристам ки шарҳ ҳол кунад ?

کرا بر تو فرستم که شرح حال کند؟

Ба номи ман зи лабати бӯсае савол кунад ?

به نام من ز لبت بوسه‌ای سؤال کند؟

Дилами қарини ғаму дарду ранҷ ва ғусса шавад

دلم قرین غم و درد و رنج و غصه شود

Чу ёди он лабу рухсору зулф ва хол кунад

چو یاد آن لب و رخسار و زلف و خال کند

На муҳаррамӣ ки лабами нома бало хонд

نه محرمی که لبم نامهٔ بلا خواند

На ҳамдамӣ ки дилами қисса висол кунад

نه همدمی که دلم قصهٔ وصال کند

Наомадаст маро дар хаёли ҷузи рухи ту

نیامدست مرا در خیال جز رخ تو

Агар чаҳ наргиси мастати ҷузин хаёл кунад

اگر چه نرگس مستت جزین خیال کند

Марои длисти саросема дар иродати ту

مرا دلیست سراسیمه در ارادت تو

Ки аз самоъи ҳадиси ту ваҷд ва ҳол кунад

که از سماع حدیث تو وجد و حال کند

Ба гирд рӯй чу моҳати зи зулф май байнам

به گرد روی چو ماهت ز زلف می‌بینم

Шабии дароз , ки рӯзи маро чу сол кунад

شبی دراز، که روز مرا چو سال کند

Агар чаҳ бори ғами худ ту саҳли пиндорӣ

اگر چه بار غم خود تو سهل پنداری

На ҳам диляш бибояд ки эҳтимол кунад ?

نه هم‌دلیش بباید که احتمال کند؟

зи сими ашки марои домнисти моломол

ز سیم اشک مرا دامنیست مالامال

Вале рухи ту куҷои илтифот мол кунад ?

ولی رخ تو کجا التفات مال کند؟

Ба дӣдании зи ту розии шудему ғамзаи ту

به دیدنی ز تو راضی شدیم و غمزهٔ تو

Умед нест ки он низро ҳалол кунад

امید نیست که آن نیز را حلال کند

зи бори ҳиҷри ту гашти Авҳадии шикаста , магар

ز بار هجر تو گشت اوحدی شکسته، مگر

Давои хеш ба дидори он ҷамол кунад

دوای خویش به دیدار آن جمال کند