Дили сармасти ман он нест ки боҳуш ояд

دل سرمست من آن نیست که با هوش آید

Магари он лаҳзаи каши овози ту дар гӯш ояд

مگر آن لحظه کش آواز تو در گوش آید

Рахти ин оташ сӯзанда ки дар синаи ниҳод

رخت این آتش سوزنده که در سینه نهاد

Аҷаб аз дег ҳавас нест ки дар ҷӯш ояд

عجب از دیگ هوس نیست که در جوش آید

Биҷузи он к-эйам ва дар пои ғуломони уфтам

بجز آن کایم و در پای غلامان افتم

Чаҳ ғуломии зи ман бетан ва бе туаш ояд ?

چه غلامی ز من بی‌تن و بی‌توش آید؟

Шарбати қанд раҳо кун , ки аз он соиду даст

شربت قند رها کن، که از آن ساعد و دست

Агарам заҳри диҳӣ бар дили ман нӯш ояд

اگرم زهر دهی بر دل من نوش آید

Магарами доъияи лутф ту бигушоед чашм

مگرم داعیهٔ لطف تو بگشاید چشم

Варна аз ман чаҳ сукӯну адаб ва ҳуш ояд ?

ورنه از من چه سکون و ادب و هوش آید؟

Ҳасани пинҳони ту бар хотири ман саҳл кунад

حسن پنهان تو بر خاطر من سهل کند

Ҳар чаҳ аз ҷаври рақибон ҷафо кӯш ояд

هر چه از جور رقیبان جفا کوش آید

Бар ниёзасту дуои дасти ҷаҳонии зану мард

بر نیازست و دعا دست جهانی زن و مرد

То крои гавҳари он ганҷ дар оғӯш ояд ?

تا کرا گوهر آن گنج در آغوش آید؟

Бим онаст ки : аз фикрату андешаи ту

بیم آنست که: از فکرت و اندیشهٔ تو

Ҳамаи таҳсил ки кардем фаромӯш ояд

همه تحصیل که کردیم فراموش آید

Бед бо қомати раънои чунон шарт онаст

بید با قامت رعنای چنان شرط آنست

Ки ба сари пеши ту , эй сарви қбопўш , ояд

که به سر پیش تو، ای سرو قباپوش، آید

Аҷаб аз толеъ худ дораму даврони фалак

عجب از طالع خود دارم و دوران فلک

Кони чунон сайд ба доми ман мадҳуш ояд

کان چنان صید به دام من مدهوش آید

Авҳадии вақти сухангар чаҳ гуҳари борад ва дар

اوحدی وقت سخن گر چه گهر بارد و در

Пеши лаъли лаб гуёӣ ту хомӯш ояд

پیش لعل لب گویای تو خاموش آید