Ту машғӯлӣ ба ҳасани худ , чаҳ ғами дории зи кори мо ?
تو مشغولی به حسن خود، چه غم داری ز کار ما؟
Ки ҳиҷронат чаҳ месозад ҳаме бо рӯзгори мо ?
که هجرانت چه میسازد همی با روزگار ما؟
Чаҳ соғарҳо тиҳӣ кардем бар ёдат : ки як зарра
چه ساغرها تهی کردیم بر یادت: که یک ذره
На сокини гашти сӯзи дил , на камтар шуд хумори мо
نه ساکن گشت سوز دل، نه کمتر شد خمار ما
Ба ҳар ҷое ки мискинӣ биафтад дасти гирндш
به هر جایی که مسکینی بیفتد دست گیرندش
Вале ин мардумиҳо худ набошад дар диёри мо
ولی این مردمیها خود نباشد در دیار ما
зи рӯяти пардаи даврии замонӣ гар барофтодӣ
ز رویت پردهٔ دوری زمانی گر برافتادی
Ҳамоно бшкФонидии гули васлии зи хори мо
همانا بشکفانیدی گل وصلی ز خار ما
Ту ҳамчун хирмани ҳасанӣ ва мо чун хӯшаи чинонт
تو همچون خرمن حسنی و ما چون خوشهچینانت
Аз он хирман чаҳ кам гаштӣ ки пар будӣ канори мо ?
از آن خرمن چه کم گشتی که پر بودی کنار ما؟
зи дилбандони он олами дили мо ҳам туро ҷӯяд
ز دلبندان آن عالم دل ما هم ترا جوید
Ки аз хубони ин гетии ту будӣ ихтиёри мо
که از خوبان این گیتی تو بودی اختیار ما
Наме бояд дили моро баҳору боғу гул бе ту
نمیباید دل ما را بهار و باغ و گل بیتو
Руху зулфу ҷабинати баси гулу боғу баҳори мо
رخ و زلف و جبینت بس گل و باغ و بهار ما
з мисли мо тиҳии дастон чаҳ кор ояд писанди ту ?
ز مثل ما تهیدستان چه کار آید پسند تو؟
Ту султонӣ , зи лутфи худ назар мекун ба кори мо
تو سلطانی، ز لطف خود نظر میکن به کار ما
Чаҳ дилдорӣ ? ки аз ҳиҷрони дили моро бёзрдӣ
چه دلداری؟ که از هجران دل ما را بیازردی
Чаҳ дмсозӣ ? ки аз даврӣ бар оварадӣ дамори мо
چه دمسازی؟ که از دوری بر آوردی دمار ما
Ба қавли душманон аз мо , хато кардӣ ки баргаштӣ
به قول دشمنان از ما، خطا کردی که برگشتی
Казон рӯй ин ситамкорӣ набӯд андари шумори мо
کزان روی این ستمکاری نبود اندر شمار ما
зи ҳиҷратгар чаҳ моро пари шкоитҳост дар хотир
ز هجرت گر چه ما را پر شکایتهاست در خاطر
Ҳанузат шукрҳо гӯйем , агар кардӣ шикори мо
هنوزت شکرها گوییم، اگر کردی شکار ما
Бигӯ то : Авҳадии зин пас нигаред дар фироқи ту
بگو تا: اوحدی زین پس نگرید در فراق تو
Кигар дарёи фурӯи боради ниФшонди ғубори мо
که گر دریا فرو بارد نیفشاند غبار ما