Ман бад-ӣни хорӣ ва ин ғурбат аз он роҳи дароз

من بدین خواری و این غربت از آن راه دراز

Ба таманнои ту афтодаам , эй шамъи тароз

به تمنای تو افتاده‌ام، ای شمع طراز

Омадам то ба дар хона саломат гӯям

آمدم تا به در خانه سلامت گویم

Ба маломати зи сари кӯчаи куҷои гирдами боз ?

به ملامت ز سر کوچه کجا گردم باز؟

Гар чаҳ дар шаҳри турои ҳам нафасон бисёранд

گر چه در شهر ترا هم نفسان بسیارند

Нафасӣ низ ба аҳволи ғарибони пардоз

نفسی نیز به احوال غریبان پرداز

Оз бисёр ба дидор ту дорад дили мо

آز بسیار به دیدار تو دارد دل ما

То бар мо нанишинӣ нанишинад он оз

تا بر ما ننشینی ننشیند آن آز

Нознино , рухи хубат ба дуо хоста ам

نازنینا، رخ خوبت به دعا خواسته‌ام

наменамой он рухи ороста ва мекун ноз

می‌نمای آن رخ آراسته و می‌کن ناز

Сар мапӣчон , ки ба рухсор ту дорем умед

سر مپیچان، که به رخسار تو داریم امید

Рух мапуашон , ки ба дидор ту дорем ниёз

رخ مپوشان، که به دیدار تو داریم نیاز

Дар намози ҳамагар зонка ҳузурӣ шартаст

در نماز همه گر زانکه حضوری شرطست

Беҳузур ту нишоед ки гузоранд намоз

بی‌حضور تو نشاید که گزارند نماز

Мушкил инаст ки : ҳар мӯии ту дар дасти длист

مشکل اینست که: هر موی تو در دست دلیست

Варна чун мӯии ту ин кор наме гашти дароз

ورنه چون موی تو این کار نمی‌گشت دراز

Рози шубаҳоти бкс чун битавон гуфт ? ки мо

راز شبهات بکس چون بتوان گفت؟ که ما

Рӯзҳо шуд ки бахуд низ нагуфтем ин роз

روزها شد که بخود نیز نگفتیم این راز

Ман худ аз доми ту дилро бурҳонами рӯзӣ

من خود از دام تو دل را برهانم روزی

Гар ту дар доми ман уфтии нрҳонндти боз

گر تو در دام من افتی نرهانندت باز

Мардумонгар чаҳ дарин шаҳри фаровони дорӣ

مردمان گر چه درین شهر فراوان داری

Авҳадиро ба худовандии худ ҳам бинавоз

اوحدی را به خداوندی خود هم بنواز