Ъноитисти худоро ба ҳоли мо имрӯз

عنایتیست خدا را به حال ما امروز

Ки шуд хуҷаста аз он чеҳраи фоли мо имрӯз

که شد خجسته از آن چهره فال ما امروز

Шабӣ чу соли бубинам ва гарна натавон гуфт

شبی چو سال ببینم و گرنه نتوان گفت

Ҳикояти шаби ҳиҷр чу соли мо имрӯз

حکایت شب هجر چو سال ما امروز

Фроқномаҳ ки даии дил ба хӯн дида навишт

فراقنامه که دی دل به خون دیده نوشت

Супурдаем ба боди шимоли мо имрӯз

سپرده‌ایم به باد شمال ما امروز

Куҷо халос шаванд аз ваболи мо фардо ?

کجا خلاص شوند از وبال ما فردا؟

Ҷамоатӣ ки шикастанди боли мо имрӯз

جماعتی که شکستند بال ما امروز

Аз он лабу рухи ҳозири ҷавоб шарт онаст

از آن لب و رخ حاضر جواب شرط آنست

Ки бӯса беш набошад саволи мо имрӯз

که بوسه بیش نباشد سؤال ما امروز

зи сими ашку зари чеҳраи ваҷҳ он бунаем

ز سیم اشک و زر چهره وجه آن بنهیم

Гар илтифоти намояд ба ҳоли мо имрӯз

گر التفات نماید به حال ما امروز

Хаёлро бифиристад дигар ба шаб ҷое

خیال را بفرستد دگر به شب جایی

Гараш вуқуф диҳанд аз хаёли мо имрӯз

گرش وقوف دهند از خیال ما امروز

Ба зулф ӯ даҳуми ин ним ҷон ки ман дорам

به زلف او دهم این نیم جان که من دارم

Ва гарна дил наниҳад бар висоли мо имрӯз

و گرنه دل ننهد بر وصال ما امروز

Ба хоби шаби магари он рӯйро тавон дидан

به خواب شب مگر آن روی را توان دیدن

Ки пеш дӯст набошад маҷоли мо имрӯз

که پیش دوست نباشد مجال ما امروز

Чу боди субҳ кунун қобилӣ наме ёбад

چو باد صبح کنون قابلی نمی‌یابد

Ки башнавад суханӣ аз мақоли мо имрӯз

که بشنود سخنی از مقال ما امروز

Сабо , баробари рухсори он ғизоли биҳишт

صبا، برابر رخسار آن غزال بهشت

Адокни ин ғазал аз ҳасби ҳоли мо имрӯз

اداکن این غزل از حسب حال ما امروز

Агар кунад талаби Авҳадии з лутф бигӯӣ

اگر کند طلب اوحدی ز لطف بگوی

Ки : беш азин накунӣ эҳтимоли мо имрӯз

که: بیش ازین نکنی احتمال ما امروز