Зиҳӣ ! зи дасти рақибони гузар ба кӯии ту мушкил
زهی! ز دست رقیبان گذر به کوی تو مشکل
зи баси ҷамол ки дорӣ , назар ба рӯй ту мушкил
ز بس جمال که داری، نظر به روی تو مشکل
Марои зи бори фироқати ҳкоитисти мтўл
مرا ز بار فراقت حکایتیست مطول
Чу чини зулфи ту дар ҳам , чу банди мӯии ту мушкил
چو چین زلف تو در هم، چو بند موی تو مشکل
Ба хобгоҳи қиёмати гузаштагони ғамат ро
به خوابگاه قیامت گذشتگان غمت را
зи хоби хуш шудани огоҳи ҷуз ба буии ту мушкил
ز خواب خوش شدن آگاه جز به بوی تو مشکل
Бар остони ту аз дасти мункирони муҳаббат
بر آستان تو از دست منکران محبت
Гузори ошиқи мискин ба ҷустуҷӯии ту мушкил
گذار عاشق مسکین به جستجوی تو مشکل
Ба рағми хуии ту гардани ҳазор нақши برارد
به رغم خوی تو گردن هزار نقش برآرد
Ки он ҳазор набошад яке чу хуии ту мушкил
که آن هزار نباشد یکی چو خوی تو مشکل
зи ғсҳо ки ту донеи кадоми азин бтар охир ?
ز غصها که تو دانی کدام ازین بتر آخر؟
Ки майли сӯй ту дорему раҳ ба сӯии ту мушкил
که میل سوی تو داریم و ره به سوی تو مشکل
Бар Авҳадӣ шудаи осон бар ту мурдану бозаш
بر اوحدی شده آسان بر تو مردن و بازش
зи даври зиндаи нишастан ба орзӯии ту мушкил
ز دور زنده نشستن به آرزوی تو مشکل