Манозили сафарати пеши дида май орм

منازل سفرت پیش دیده می‌آرم

Агар чаҳ ҳеҷ ба манзил намерасад боРом

اگر چه هیچ به منزل نمی‌رسد بارم

Гиёҳ меҳр бирӯяд зи хоки манзили ту

گیاه مهر بروید ز خاک منزل تو

Ки ман з дида бирав оби меҳр май боРом

که من ز دیده برو آب مهر می‌بارم

Аз он ба рӯзи видоъат ниҳон шудам зи назар

از آن به روز وداعت نهان شدم ز نظر

Каз оби чашми равон фош мешуд асрорам

کز آب چشم روان فاش میشد اسرارم

Маҷол омадану пои роҳ рафтан нест

مجال آمدن و پای راه رفتن نیست

Ки рахти хеш бар он хок остон дорам

که رخت خویش بر آن خاک آستان دارم

Ба рӯз гӯямат : имшаб ба хоб хоҳам дид

به روز گویمت: امشب به خواب خواهم دید

Чу шаб шавад ҳамаи шаб то ба рӯзи бедорам

چو شب شود همه شب تا به روز بیدارم

Гарм ба рӯз қарораст ё ба шаб бе ту

گرم به روز قرارست یا به شب بی‌تو

зи рӯзи васлу шаби суҳбати ту безорам

ز روز وصل و شب صحبت تو بیزارم

Ба ҷои онам , агар бар дилами ббхшоинд

به جای آنم، اگر بر دلم ببخشایند

Ки дил бидодам ва аз дарди бедилии зорам

که دل بدادم و از درد بیدلی زارم

Маро ба хон вази дарди фироқ ҳеҷ мапурс

مرا به خوان وز درد فراق هیچ مپرس

Ки оби дида ниёбат кунад зи гуфторам

که آب دیده نیابت کند ز گفتارم

Бабри зи ман тамаъи тўъу бандагӣ , ки ҳануз

ببر ز من طمع طوع و بندگی، که هنوز

Бидон каманд ки афгандае гирифторам

بدان کمند که افگنده‌ای گرفتارم

Битоб дӯзахи ҳиҷрон тамом хоҳам сӯхт

بتاب دوزخ هجران تمام خواهم سوخت

Агар сабк набадӣ дар биҳишти дидорам

اگر سبک نبدی در بهشت دیدارم

Туе зи мардуми чашмами азизтар ,гар чаҳ

تویی ز مردم چشمم عزیزتر، گر چه

Ман аз барои ту дар чашми мардумони хорам

من از برای تو در چشم مردمان خوارم

Дил аз рикоби ту холӣ намешавад борӣ

دل از رکاب تو خالی نمی‌شود باری

Агар чаҳ нест бар он дар чу Авҳадии боРом

اگر چه نیست بر آن در چو اوحدی بارم