Ҳар бомдод рӯй ту дидан чу офтоб

هر بامداد روی تو دیدن چو آفتاب

Моро расад , ки бе ту надидем рӯй хоб

ما را رسد، که بی‌تو ندیدیم روی خواب

Моро длисти гумшуда дар чини зулфи ту

ما را دلیست گمشده در چین زلف تو

Акнӯн ки ҳол бо ту бигуфтем , бозёб

اکنون که حال با تو بگفتیم، بازیاب

Борӣктар зи мӯии сؤолист дар дилам

باریک تر ز موی سؤالیست در دلم

Ширинтар аз лаб ту нагӯяд касе ҷавоб

شیرین‌تر از لب تو نگوید کسی جواب

Рӯяти зи равшанӣ чу биҳиштаст ва ман зи дард

رویت ز روشنی چو بهشتست و من ز درد

Дар вай ба ҳайратам ки : биҳиштаст ё азоб ?

در وی به حیرتم که: بهشتست یا عذاب؟

Чашмами зи оби гиря ба ҷӯшаст ҳамчуи дег

چشمم ز آب گریه به جوشست همچو دیگ

Ишқи оташӣ ҳаме кунад оҳистаи зери об

عشق آتشی همی کند آهسته زیر آب

Ҳар дил ки дид оби ду чашмам кабоб шуд

هر دل که دید آب دو چشمم کباب شد

Броби дидае , ки дил кас шавад кабоб ?

برآب دیده‌ای، که دل کس شود کباب؟

Ҷузи як шароб ҳар ду нахурдем , пас чаро

جز یک شراب هر دو نخوردیم، پس چرا

Чашми ту масти гашту дили Авҳадии хароб ?

چشم تو مست گشت و دل اوحدی خراب؟