То фоши гашти зикри даҳон чу қанди ту

تا فاش گشت ذکر دهان چو قند تو

Рағбат намекунад ба шукри дардманди ту

رغبت نمی‌کند به شکر دردمند تو

Муҳтоҷ қайд нест , ки зиндониёни ишқ

محتاج قید نیست، که زندانیان عشق

Берун наме раванд ба ҷавр аз каманди ту

بیرون نمی‌روند به جور از کمند تو

Киштанд дар канори чамани сарвҳо басӣ

کشتند در کنار چمن سروها بسی

Лекин намерасанд ба қади баланди ту

لیکن نمی‌رسند به قد بلند تو

Гар сад ғубор бар дил ман бошад аз ғамат

گر صد غبار بر دل من باشد از غمت

Мушкил ҷудо шавам зи Аннани саманди ту

مشکل جدا شوم ز عنان سمند تو

Вари дайгарии зи теғи ҷафои ту сар кашад

ور دیگری ز تیغ جفای تو سر کشد

Ман сар наме кашам , ки шудам пои банди ту

من سر نمی‌کشم، که شدم پای بند تو

Кардам фидои ту дилу дайн ва тавону ҷон

کردم فدای تو دل و دین و توان و جان

То худ кадом бошад азинҳо писанди ту ?

تا خود کدام باشد ازین‌ها پسند تو؟

Аз дардати Авҳадӣ суханӣ дорад , эй нигор

از دردت اوحدی سخنی دارد، ای نگار

Бишинав ҳикоятӣ ки кунад дардманди ту

بشنو حکایتی که کند دردمند تو