Гул дар қурӯқ арақ кунад аз шарм рӯй ту
گل در قرق عرق کند از شرم روی تو
Софӣ ба кӯчҳо дӯд аз ҷустуҷӯии ту
صافی به کوچها دود از جستجوی تو
Дар шона дид мӯии ту софӣ ва зон замон
در شانه دید موی تو صافی و زان زمان
Брсинаҳ санг мезанад аз шавқи мӯии ту
برسینه سنگ میزند از شوق موی تو
Бар пои сарву бед наад рӯй ҳар нафас
بر پای سرو و بید نهد روی هر نفس
Софии зи ҳасрату ҳаваси қад ва рӯй ту
صافی ز حسرت و هوس قد و روی تو
Мишкӣн кунад канору лабаш ҳар ба муддатӣ
مشکین کند کنار و لبش هر به مدتی
Он боди машки без киед зи сӯии ту
آن باد مشک بیز که اید ز سوی تو
Софӣ ба ҷои об равонҳо кунад нисор
صافی به جای آب روانها کند نثار
Бар дасти онкӣ об занад хоки кӯии ту
بر دست آنکه آب زند خاک کوی تو
Дасташ ба ҷон намерасад , ар не ба ҷои об
دستش به جان نمیرسد، ار نی به جای آب
намекард ҷони хештани андари гулӯии ту
میکرد جان خویشتن اندر گلوی تو
Рӯзии буна ба хӯрдан май пой дар қурӯқ
روزی بنه به خوردن میپای در قرق
То мо ба сари кашем чу софии кадуии ту
تا ما به سر کشیم چو صافی کدوی تو
Кӣ кардамӣ ман аз лаби софии ҳадис ? агар
کی کردمی من از لب صافی حدیث؟ اگر
Вақте бирав даҳон наниҳодӣ сабуии ту
وقتی برو دهان ننهادی سبوی تو
Ту дар Мароғаи фориғу сӯфӣ ба навбаҳор
تو در مراغه فارغ و صوفی به نوبهار
Дар хоку хӯни Мароғаи занони зи орзӯии ту
در خاک و خون مراغهزنان ز آرزوی تو
Бар мо ту баста дар чу қурӯқи солу моҳ ва мо
بر ما تو بسته در چو قرق سال و ماه و ما
Сар дар ҷаҳони ниҳода чу софӣ ба буии ту
سر در جهان نهاده چو صافی به بوی تو
Софии зи санги тафриқа фарёд ме кунад
صافی ز سنگ تفرقه فریاد میکند
Монанди Авҳадӣ , ки бинолад зи хуии ту
مانند اوحدی، که بنالد ز خوی تو