Чаҳ пайкарӣ ? ки зи покӣ чу гавҳар нобе

چه پیکری؟ که ز پاکی چو گوهر نابی

Зиҳӣ , саодати он хуфтаи каши ту ҳам хобӣ

زهی، سعادت آن خفته کش تو هم خوابی

Ниқоби турраи шбрнги зери чеҳра чаҳ суд ?

نقاب طرهٔ شبرنگ زیر چهره چه سود؟

Ки чун ситораи равшани зи зер май тобӣ

که چون ستارهٔ روشن ز زیر می‌تابی

Дилами зи пистаи танги ту чун брондишд

دلم ز پستهٔ تنگ تو چون براندیشد

Ба чеҳри зарду дами ашкҳои уннобӣ

به چهر زرد و دم اشکهای عنابی

Бақои ҳасан чу гул чанд рӯз ме бошад

بقای حسن چو گل چند روز می‌باشد

Бакӯш то магари ин чанд рӯз дарёбӣ

بکوش تا مگر این چند روز دریابی

Кашидае чу камони душмани маро дар бар

کشیده‌ای چو کمان دشمن مرا در بر

Марои зи пеши миФгн чу тири партобӣ

مرا ز پیش میفگن چو تیر پرتابی

Миннати з тофтани зулф манъ ме кардам

منت ز تافتن زلف منع می‌کردم

Чунон шудӣ ки кунун рӯй низ май тобӣ

چنان شدی که کنون روی نیز می‌تابی

Биё , ки мардумаки чашми Авҳадӣ бе ту

بیا، که مردمک چشم اوحدی بی‌تو

Ба ашки дидаи фурушад чу мардуми обӣ

به اشک دیده فروشد چو مردم آبی