Он ки лутфаши гиреҳ аз хотир мо бигушоед

بهار آمد و یار کسی نمی‌آید

Гиреҳи хотир ӯ лутф худо бигушоед

چنین بهار به کار کسی نمی‌آید

Кас барои дили мо даст атое нагушӯд

چه سود ز آمدن سرو و لاله و سوری

Ҳам магари аҳли дилии даст ато бигушоед

چو سرو لاله‌عذار کسی نمی‌آید

Аз худои ҷӯии гушоиш ки нагардад ҳаргиз

همیشه گل به بهار آمدی چه شد کامسال

Бастаи онкор ки аз коргшо бигушоед

گلِ همیشه‌بهار کسی نمی‌آید

Ҷуз ба кӯии ту дил мо накушояд оре

چو من غریب دیار کسی مباد آنجا

Дил ки онҷо накушояд бкҷо бигушоед ?

کسی ز یار و دیار کسی نمی‌آید

Дар риёзӣ ки сару кори гулаш бо хор аст

ز می مباد تهی جامش از چه ساقی ما

Кӣ дили булбул бебарг ва наво бигушоед ?

ترحمش به خمار کسی نمی‌آید

Толеъии кӯ ки барам масти шабӣ ё рӯзӣ

کسی که شمع وی افروخته‌ست بخت چرا

Калла аз сари бунаади банд қабо бигушоед

به خاطرش شب تار کسی نمی‌آید

Ду ҷаҳони ҷону дил аз ҳар шикан ояд берун

رفیق را سگ خود نشمری و حق با تست

Гиреҳӣ каз сари он зулфи ду то бигушоед

که ناکسی به شمار کسی نمی‌آید