Онро ки нест огаҳии Аслан зи сари ғайб
آن را که نیست آگهی اصلا ز سر غیب
Гар дрнёФти сари даҳони туро чаҳ айб
گر درنیافت سر دهان ترا چه عیب
Аз сари ғайб кас нашуд огоҳ ғам махӯр
از سر غیب کس نشد آگاه غم مخور
Май хур ки ҳеҷ кас нашуд огаҳи зи сари ғайб
می خور که هیچ کس نشد آگه ز سر غیب
Дар шак фиканд зоҳидам аз май , ва лек ман
در شک فکند زاهدم از می، و لیک من
Шастам ба соф май зи дили хеши шаку риб
شستم به صاف می ز دل خویش شک و ریب
Дар маҳфилӣ ки соқии мо ме, диҳад , касе
در محفلی که ساقی ما می، دهد، کسی
Коўл кунад шурӯ ба саҳбо буд сҳиб
کاول کند شروع به صهبا بود صهیب
Бинад агар зи чоки гиребони тани ту ро
بیند اگر ز چاک گریبان تن تو را
Дар боғи гули зи шарм буд сари фурӯ ба ҷайб
در باغ گل ز شرم بود سر فرو به جیب
Дардо ки умр рафт ва нашуд равшанам ки чун
دردا که عمر رفت و نشد روشنم که چون
Фасли шабоб тай шуд ва омад замони шеб
فصل شباب طی شد و آمد زمان شیب
Донад рафиқи коши як аз айбҳои хеш
داند رفیق کاش یک از عیبهای خویش
Онкас ки донад зи ман мискини ҳазор айб
آنکس که داند ز من مسکین هزار عیب