Саҳар ба домани кҳсор , лола гуфт ба санг
سحر به دامن کهسار، لاله گفت به سنگ
зи рангу буии ҷавонӣ , чаҳ буд ҳосили мо ?
ز رنگ و بوی جوانی، چه بود حاصل ما؟
Ба дарду доғ дар ин гӯша сӯхтем ва набӯд
به درد و داغ در این گوشه سوختیم و نبود
Касе ки барзанади обӣ бар оташи дили мо
کسی که برزند آبی بر آتش دل ما
На сарв бар серуми афрошти соябони рӯзӣ
نه سرو بر سرم افراشت سایبان روزی
На андалеб , шабӣ нағма зад ба маҳфили мо
نه عندلیب، شبی نغمه زد به محفل ما
На чашмӣ аз рухи рангини мо насибӣ ёфт
نه چشمی از رخ رنگین ما نصیبی یافت
На чашма , оина биниҳод дар муқобили мо
نه چشمه، آینه بنهاد در مقابل ما
Дар ин баҳор ки ҷамъанд шоҳидони чаман
در این بهار که جمعند شاهدان چمن
Қазо фиканд ба домони кӯҳи манзили мо
قضا فکند به دامان کوه منزل ما
Ба хира , чеҳра барафрӯхтему пжмрдим
به خیره، چهره برافروختیم و پژمردیم
Надидаи раҳгузарӣ , ҷилваи шамоили мо
ندیده رهگذری، جلوه شمایل ما
зи ҳарф лола барошуфт санги хора ва гуфт :
ز حرف لاله برآشفت سنگ خاره و گفت:
Ки эй мусоҳиби худбину ёри ғофили мо
که ای مصاحب خودبین و یار غافل ما
Ба шукр кӯш ,гар аз варта бало даврем
به شکر کوش، گر از ورطه بلا دوریم
Ки нест раҳи ғаму андӯҳро ба соҳили мо
که نیست ره غم و اندوه را به ساحل ما
Аз он гуруҳи мунофиқ ки хасми икдгрнд
از آن گروه منافق که خصم یکدگرند
Гушӯда кӣ шавад эй дӯст , уқдаи дили мо
گشوده کی شود ای دوست، عقده دل ما
Чу хор таъна мазан ,гар на ҳам нишин гулӣ
چو خار طعنه مزن، گر نه همنشین گلی
Ки ҳам нишин ман ва туаст бахти мқбли мо
که همنشین من و توست بخت مقبل ما
Ба гӯшагирӣ , маҷмӯ бошу дами даракаш
به گوشهگیری، مجموع باش و دم درکش
Каз иҷтимо , парокандагии сети ҳосили мо
کز اجتماع، پراکندگیست حاصل ما