Оқоҳсини хон ном дошта ва бар таҳсили маротиби улё ҳиммат мегумошта . Аўқотш ба хизмати фуқарои масруфу хотираш ба суҳбати урафои машъуф . Соликии хлиқу хушҳолу дарвешии шафиқу соҳиб камол бӯда . Маснавӣ ба тарзи бӯстони шайхи саъдӣ ба қурби даҳ ҳазор байт манзум намӯда . Ниҳоят фасоҳат дорад . Аз он ҷаноб навишта шуд :
آقاحسین خان نام داشته و بر تحصیل مراتب علیا همت میگماشته. اوقاتش به خدمت فقرا مصروف و خاطرش به صحبت عرفا مشعوف. سالکی خلیق و خوشحال و درویشی شفیق و صاحب کمال بوده. مثنوی به طرز بوستان شیخ سعدی به قرب ده هزار بیت منظوم نموده. نهایت فصاحت دارد. از آن جناب نوشته شد:
Гирифтам онкӣ гушойанд пои бастаи мо
گرفتم آنکه گشایند پای بستهٔ ما
Чаҳ мекунанд ба болу пари шикастаи мо
چه میکنند به بال و پر شکستهٔ ما
Гувоҳи инки на ринд ва на зоҳидем бас аст
گواه اینکه نه رند و نه زاهدیم بس است
Пиёлаи тиҳӣу сбҳаҳи гусастаи мо
پیالهٔ تهی و سُبحهٔ گسستهٔ ما
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Хушаст ин боғ аммо боғбонаши ҳайфи натавонад
خوش است این باغ اما باغبانش حیف نتواند
Гулӣ бар шохсору булбулӣ дар ошён бинад
گلی بر شاخسار و بلبلی در آشیان بیند
мнмснўётаҳ
مِنْمثنویاته
Ба касрӣ чаҳ хуш гуфт бўзри ҷмҳр
به کسری چه خوش گفت بوذر جمهر
Ки то май хиромад ба комати сипеҳр
که تا میخرامد به کامت سپهر
Мабодо ба каси кӣнаи варзади дилат
مبادا به کس کینه ورزد دلت
Млрзони дилӣ то наларзад дилат
ملرزان دلی تا نلرزد دلت
Яке арра бар пои сарвии ниҳод
یکی اره بر پای سروی نهاد
Ба дасти ваии он сарв аз по фитод
به دست وی آن سرو از پا فتاد
Дигар рӯз додаш мукофоти даст
دگر روز دادش مکافات دست
Ки аз сарвӣ афтод поиши шикаст
که از سروی افتاد پایش شکست
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Чаҳ некӯ ба зан гуфт деҳқони даҳ
چه نیکو به زن گفت دهقان ده
Ки ноне ба айтоми ҳамсояи даҳ
که نانی به ایتام همسایه ده
Ки чун мо намонем зи анъоми мо
که چون ما نمانیم ز انعام ما
Гурусна намонанд айтоми мо
گرسنه نمانند ایتام ما
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Ба даврони ду касро агар дидамӣ
به دوران دو کس را اگر دیدمی
Ба гирди сар ҳар ду грдидмӣ
به گرد سر هر دو گردیدمی
Яке онкӣ гуяд бади ман ба ман
یکی آنکه گوید بد من به من
Дигар онкии пурсади бдхўиштн
دگر آنکه پرسد بدخویشتن
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Дилами сӯхт бар соликии раҳи навард
دلم سوخت بر سالکی ره نورد
Ки мегуфт бо ҳасрату сӯзу дард
که میگفت با حسرت و سوز و درد
Ки умрӣ дар ин роҳ бишитофтам
که عمری در این راه بشتافتم
На рустам на ворастаа ам ёфтам
نه رستم نه وارستهام یافتم
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Бар он тахти заррин ки ҷам ме нишаст
بر آن تخت زرین که جم مینشست
Шунидам чу бархест ин нақши баст
شنیدم چو برخاست این نقش بست
Чу бояд аз ин тахти дрхостн
چو باید از این تخت درخاستن
Наярзад нишастан ба бархестан
نیرزد نشستن به برخاستن
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Яке аз асирони ширини нафас
یکی از اسیران شیرین نفس
намеронад дар базм аз худ магас
نمیراند در بزم از خود مگس
Ки чун гирад аз рондан ман гарон
که چون گیرد از راندن من گران
Мабодо диҳад заҳмати дигарон
مبادا دهد زحمت دیگران