Ъздро писари сахти ранҷур буд
عَضُد را پسر سخت رنجور بود
Шикеб аз ниҳоди падари давр буд
شکیب از نهادِ پدر دور بود
Яке порсо гуфташ аз рӯй панд
یکی پارسا گفتش از رویِ پند
Ки бигзор мурғони ваҳшии зи банд
که بگذار مرغانِ وحشی ز بند
Қафасҳои мурғ саҳар хон шикаст
قفسهای مرغِ سحرخوان شکست
Ки дар банд монад чу зиндони шикаст ?
که در بند ماند چو زندان شکست؟
Нигаҳ дошт бар тоқи бустони сарой
نگه داشت بر طاقِ بُستان سَرای
Яке номвари булбули хуши сарой
یکی نامور بلبلِ خوشسُرای
Писари субҳдами сӯии бустони шитофт
پسر صبحدم سویِ بستان شتافت
Ҷузи он мурғ бар тоқ айвон наёфт
جز آن مرغ بر طاقِ ایوان نیافت
Бихандед к-эии булбули хуши нафас
بخندید کای بلبلِ خوشنفس
Ту аз гуфт худ мондае дар қафас
تو از گفتِ خود ماندهای در قفس
Надорад касе бо ту ногуфтаи кор
ندارد کسی با تو ناگفته کار
Валикин чу гуфтӣ далелаш биор
ولیکن چو گفتی دلیلش بیار
Чу саъдӣ ки чанде забони баста буд
چو سعدی که چندی زبان بستهبود
зи таъни забони оварони руста буд
ز طعنِ زبانآوران رَسته بود
Касе гирад ороми дил дар канор
کسی گیرد آرامِ دل در کنار
Ки аз суҳбат халқ гирад канор
که از صحبتِ خلق گیرد کنار
Макун айби халқ , эй хирадманд , фош
مکُن عیبِ خلق، ای خردمند، فاش
Ба айби худ аз халқ машғӯл бош
به عیبِ خود از خلق مشغول باش
Чу ботил саройанд мгмори гӯш
چو باطل سُرایند مگمار گوش
Чу бе стар бинӣ басират бапуш
چو بیستر بینی بصیرت بپوش