Дӯши давр аз рӯят эй ҷони ҷонам аз ғам тоб дошт
دوش دور از رویت ای جان، جانم از غم تاب داشت
Абри чашмам бар рух аз савдои дил сайлоб дошт
ابر چشمم بر رخ از سودای دل سیلآب داشت
Дар тафаккури ақли мискини поймол ишқ шуд
در تفکر عقل مسکین پایمال عشق شد
Бо парешонеи дили шӯридаи чашм хоб дошт
با پریشانی دل شوریده چشم خواب داشت
Кӯс ғорат зад фироқати гирди шаҳристони дил
کوس غارت زد فراقت گِرد شهرستان دل
Шаҳнаи ишқати сарои ақл дар тбтоб дошт
شحنهٔ عشقت سرای عقل در طبطاب داشت
Нақш науммат карда дили миҳроби тасбеҳи вуҷӯд
نقش نامت کرده دل محراب تسبیح وجود
То саҳари тасбеҳи гӯйон рӯй дар миҳроб дошт
تا سحر تسبیحگویان، روی در محراب داشت
Дидаам май ҷуст ва гуфтандам набинӣ рӯй дӯст
دیدهام میجست و گفتندم نبینی روی دوست
Худ дирафшон буд чашмам кандар ӯ симоб дошт
خود درفشان بود چشمم کاندر او سیماب داشت
зи осмони оғози корами сахт ширин ме намӯд
ز آسمان آغاز کارم سخت شیرین مینمود
Кӣ гумони барадам ки шҳдолўдаҳи заҳр ноб дошт
کی گمان بردم که شهدآلوده زهر ناب داشت؟
Саъдии ин раҳ мушкил афтодаст дар дарёии ишқ
سعدی این ره مشکل افتادست در دریای عشق
Аввали охир дар сабурии андакӣ поёб дошт
اول آخر در صبوری اندکی پایاب داشت