Чу абри зулфи ту пиромни қамар май гашт
چو ابر زلف تو پیرامن قمر میگشت
зи абри дидаи канорам ба ашктар май гашт
ز ابر دیده کنارم به اشک تر میگشت
зи шӯри ишқи ту дар коми ҷони хастаи ман
ز شور عشق تو در کام جان خسته من
Ҷавоби талхи ту ширинтар аз шукр май гашт
جواب تلخ تو شیرینتر از شکر میگشت
Хуии изори ту бар хок тира ме афтод
خوی عذار تو بر خاک تیره میافتاد
Вуҷӯди мурда аз он оби ҷонвар май гашт
وجود مرده از آن آب جانور میگشت
Агар маро ба зару сими дастрас будӣ
اگر مرا به زر و سیم دسترس بودی
зи сими синаи ту кори ман чу зар май гашт
ز سیم سینه تو کار من چو زر میگشت
Дил аз даричаи фикрат ба нафас нотиқа дод
دل از دریچه فکرت به نفس ناطقه داد
Нишони ҳолати зорам ки зортар май гашт
نشان حالت زارم که زارتر میگشت
зи шавқ рӯй ту андари сари қалами савдо
ز رشک قد تو اندر سر قلم سودا
Фитод ва чун ман сўдоздаҳ ба сар май гашт
فتاد و چون من سودازده به سر میگشت
зи хотирами ғазалии сўзнок рӯй намӯд
بخاطرم غزلی سوزناک روی نمود
Ки дар димоғи фироқи ман ин қадар май гашт
که در دماغ خیال من این قدر میگشت