Дилам аз дасти ғамати доман саҳро бигирифт
دلم از دست غمت دامن صحرا بگرفت
Ғамат аз сар нануҳумгар дилат аз мо бигирифт
غمت از سر ننهم گر دلت از ما بگرفت
Холи мишкӣни ту аз банда чаро дар хат шуд
خال مشکین تو از بنده چرا در خط شد
Магар аз дӯди дилам рӯй ту савдо бигирифт
مگر از دود دلم روی تو سودا بگرفت
Дӯш чун машъалаи шавқ ту бигирифт вуҷӯд
دوش چون مشعله شوق تو بگرفت وجود
Соя эй дар дилами андохт ки сад ҷо бигирифт
سایهای در دلم انداخت که صد جا بگرفت
Ба дами сарди саҳаргоҳии ман бозншст
به دم سرد سحرگاهی من بازنشست
Ҳар чароғӣ ки замин аз дил саҳбо бигирифт
هر چراغی که زمین از دل صهبا بگرفت
Алғёс аз ман дили сӯхтае сангини дил
الغیاث از من دل سوخته ای سنگین دل
Дар ту нагирифт ки хӯн дар дил хоро бигирифт
در تو نگرفت که خون در دل خارا بگرفت
Дили шӯридаи мо олами андешаи мост
دل شوریده ما عالم اندیشه ماست
Олам аз шавқи ту дар тоб ки ғавғо бигирифт
عالم از شوق تو در تاب که غوغا بگرفت
Брбўданда ту сабраму некӯи брбўд
بربود انده تو صبرم و نیکو بربود
Бигирифтанда ту ҷонам ва зебо бигирифт
بگرفت انده تو جانم و زیبا بگرفت
Дили саъдии ҳамаи зи айёми балои парҳезад
دل سعدی همه ز ایام بلا پرهیزد
Сари зулф ту надонам ба чаҳ ёро бигирифт
سر زلف تو ندانم به چه یارا بگرفت